रविवार, 28 फ़रवरी 2010

होली के रंग ....


ये रंग हो प्यार का

ये रंग हो खुशियों का ,

ये रंग भरे जज्बातों में

ये रंग अपने होने के

अहसासों में ,

ये रंग हमारी खुशियों के

हर पलो में ,

ये रंग बेरंग न हो

किसी बात से ।

ये रंग भरा हो

अटूट रिश्तों से ,

ये रंग न हो

जीत -हार का ,

ये रंग न हो

द्वेष -दुर्व्यवहार का ,

ये रंग हो

सिर्फ प्यार का ,

ये रंग हो

सिर्फ बहार का ।

--------------------------------

सभी मित्रो को इस रंग पर्व की हार्दिक शुभकामनाये ,हर आँगन में बिखरे उम्मीद भरे रंग ।

मंगलवार, 23 फ़रवरी 2010

अहसास.......



धीरे-धीरे यह अहसास हो रहा है,


वो मुझसे अब कहीं दूर हो रहा है।


कल तक था जो मुझे सबसे अज़ीज़,


आज क्यों मेरा रकीब हो रहा है।


*************************


इन्तहां हो रही है खामोशी की,


वफाओं पे शक होने लगा अब कहीं।


****************************


जिंदगी है दोस्त हमारी,


कभी इससे दुश्मनी,


कभी है इससे यारी।


रूठने -मनाने के सिलसिले में,


हो गई कहीं और प्यारी


****************************


इस इज़हार में इकरार


नज़रंदाज़ सा है कहीं,


थामते रह गए ज़रूरत को,


चाहत का नामोनिशान नहीं।


...................................................


ये बहुत पुरानी रचना है किसी के कहने पर फिर से पोस्ट कर रही हूँ


शुक्रवार, 19 फ़रवरी 2010

काश..




'काश'
ज़िन्दगी के
हर पृष्ठ पर
जमे हुए है
बेहिसाब ,
जहाँ उठी
बेबसी
चल दिये साथ ।
असीमित
असंभव
पथ में ,
सर्वदा रहे
उदास ,
'काश '
बेहद ख़ास ।









मंगलवार, 16 फ़रवरी 2010

उड़ न जाये



ऐसे कब तक हम भरमाये


मन को कहाँ तक भटकाए ,


कोई राह तो आये सामने


ख्याल क्यों उलझते जाये ,


आगे कुआं पीछे खाई


कही इनमे हम गिर जाये ,


फंसकर गर्द की भंवर में


डर है कही उड़ जाये

शनिवार, 13 फ़रवरी 2010

ब्लोगर बंधुओ के नाम

कब किससे कैसे कहें


अपने दिल की बात ,


इन सारी बातों से


हम सभी हुए आजाद


एक साथी ब्लौग है,


दूजी कलम है पास


जीवन के हर रंग में


एक दूजे के साथ ,


सारी दुनिया जोड़ के


तनहा नहीं कोई आज


एक ही जाल बुन रहा


सुंदर सुखद समाज


यहाँ किसी का शोर है


और ना मन पे ज़ोर ,


खुले आकाश में उड़ रही


आज पतंग निसोच ,


उस के रास्ते काटने


आएगा नहीं कोई और


इन्द्र -धनुष के रंगों से


हो रही यहाँ मुलाक़ात ,


मंजिल के साथ ही मानो


चल रहे सब आज

मंगलवार, 9 फ़रवरी 2010

नरम गरम ....

आज चाँद

है कुछ

नरम -गरम ,

और कर रहा

शायद

वनवास में भ्रमण ,

बदरी के ओट में भी

नहीं छिपा हुआ ,

देखता नहीं तो

जरूर दर्पण ,

चांदनी भी आज

जला रही ,

है जरूर बैठा

किसी कोप भवन ,

जो निकले मिजाज

बदलकर बाहर ,

और चेहरे पर

बिखरी हो मुस्कान ,

कह देना तब

उसे कही ,

यारो मेरा

दुआ सलाम


शुक्रवार, 5 फ़रवरी 2010

सूरज ढूँढ लाओ

सूरज ढूँढ लाओ

जब खो जाये ,

चाँद को उठाओ

जब सो जाये

तारो को दो आवाज़

जब छुप जाये

सुर मीठे छेड़ो

उदास कही जब ,

मन ये हो जाये