रविवार, 19 अप्रैल 2015

मन के मोती

हर फिक्र से आजाद हम होने लगे है ,
सोचने सबके लिए अब कम लगे है .
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शिकायतो मे ही हमेशा जिन्दगी
बसर करना अच्छा नही ,
लौटकर नही आता यहॉ फिर
जो गुजर जाता हैै वक्त कभी .


मंगलवार, 7 अप्रैल 2015

सालगिरह पर

आज का दिन ही ऐसा है जो हमे
लिखने को मजबूर कर रहा है ,
क्योकि हमारी जिन्दगी से ये
एक बर्ष को दूर कर रहा है .
जो आती है चीज यहॉ वो जाती भी है
इसे बयां हमारा  दस्तूर कर रहा है .