आदमी.....

आदमी जिंदगी के जंगल में

अपना ही करता शिकार है ,

फैलाता है औरो के लिए जाल

और फसता खुद हर बार है ।
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टिप्पणियाँ

बहुत सही..पर मानव की प्रवृति हैं सोचता अपने अनुरूप ही है
ज्योति सिंह ने कहा…
धन्यवाद संजय

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