हार्दिक आभार, संगीता जी बहुत बहुत धन्यबाद ,इसी प्रकार मार्गदर्शन करती रही, कभी भी कोई कमी नजर आये बेझिझक बताये और साथ में सुधार भी दे, मैं तो चाहती हूँ, आपलोगो के संगत का मुझे भी फायदा मिले, अच्छा सीख पाऊँ अच्छा लिख पाऊँ,जिससे आप सभी के साथ जुड़ी रहूँ,गलती होना बड़ी बात नही,सही होना बड़ी बात है, आप बहुत अच्छी है ,ये अपनापन यू ही बनाये रहे। कभी कभी गलतियां भी कुछ अच्छा कर जाती है , आज मै बहुत खुश हूँ, ऐसी गलतियों पर नाज है जो जिंदगी को बेहतर बना जाये।
प्रिय ज्योति, तुमने मेरी बात को सकारात्मक लिया उसके लिए शुक्रिया । थोड़ा झिझक रही थी लिखते हुए । लेकिन मैंने देखा है अपनी पुरानी पोस्ट पर तुमको तो मालूम है कि तुम मेरी पुरानी पाठक हो । इस लिए मुझे थोड़ा जानती होंगी । अभी ठीक है ये तुमने ऊपर की पंक्तियों से मिलाते हुए स्त्रीलिंग में लिख दिया था । ऐसा मुझे लगता है ।अभी परफेक्ट । 👌👌👌👌👌
टिप्पणियाँ
मार्मिक रचना .
सादर
तुमने मेरी बात को सकारात्मक लिया उसके लिए शुक्रिया । थोड़ा झिझक रही थी लिखते हुए । लेकिन मैंने देखा है अपनी पुरानी पोस्ट पर तुमको तो मालूम है कि तुम मेरी पुरानी पाठक हो । इस लिए मुझे थोड़ा जानती होंगी ।
अभी ठीक है ये तुमने ऊपर की पंक्तियों से मिलाते हुए स्त्रीलिंग में लिख दिया था । ऐसा मुझे लगता है ।अभी परफेक्ट । 👌👌👌👌👌
आदरणीय ज्योति जी बहुत ही सुंदर रचना