आज के दिन ही हम एक हुए थे....कितना लम्बा सफ़र तय कर लिया, याद ही नहीं। लगता है कल की ही तो बात थी........ अहसास कभी उम्र नहीं पाते , कितनी सच्ची बात है ये। जीवन की ऊंची-नीची डगर पर चलते हुए कब एक अजनबी इतना अपना हो जाता है पता ही नहीं चलता.... ..... सुख-दुख के साझेदार हुए, जीवनभर के साथ हुए। कानों में संगम के गीत प्रिये, तुम तो मेरे मीत प्रिये। आंसुओं से भीगे हुए, पलकों पर कुछ अद्भुत सपने, हमने जो आँखों में समां लिए, तुम तो मेरे मीत प्रिये। उजियाले का अधिकार लिए, मिटा तम के आकर्षण प्रिये। ढलते सूरज को दे आवाज़, हर हार को निरस्त करके, मुश्किलों में मुस्कान लिए, तुम तो मेरे मीत प्रिये। इस जीवन के गीतों के स्वर नहीं आसान प्रिये, जहां मिले स्वर हमारा मधुर वही संगीत प्रिये। चलते रहे अगर साथ यूं ही, हर मुश्किल है आसान प्रिये, तुम तो मेरे मीत प्रिये, जीवन का संगीत प्रिये.
टिप्पणियाँ
आ सब छोड़ चले ,
हर किसी को यहाँ
अपने हाल पे रहने दे।
ज्योति जी अक्षर शः सत्य है ये बात । आज के परिपेक्ष्य में जितना लोगों को उनके हाल पे छोड़ देंगे उतना ही आप तनाव मुक्त होंगे । पर इस पर अमल करने में वक्त लग सकता है
बहुत ही सुन्दरता और सरलता से अपने मन के भावो को उकेर दिया है |
आभार
sunder rachana .
हर किसी को यहाँ
अपने हाल पे रहने दे
bahut khoob n SHUKRIYA BHEE MITR !!
आ सब छोड़ चले ,
हर किसी को यहाँ
अपने हाल पे रहने दे...बहुत खूब 👌
बहुत सुंदर रचना प्रिय ज्योति जी।
सस्नेह
सादर।
हृदय से आभार इस सुंदर रचना के लिए।
आ सब छोड़ चले ,
हर किसी को यहाँ
अपने हाल पे रहने दे।
बचाव की इस जद्दोजहद का फायदा उठाते है रिश्ते ...
अपनी मनमानी पर उतर आते हैं रिश्ते
टूटने का डर जिन्हें न हो वो अपने ही कहाँ
फिर हालात पर छोड़ देना ही बेहतर है ऐसे रिश्ते
बहुत ही हृदयस्पर्शी लाजवाब सृजन।