आज के दिन ही हम एक हुए थे....कितना लम्बा सफ़र तय कर लिया, याद ही नहीं। लगता है कल की ही तो बात थी........ अहसास कभी उम्र नहीं पाते , कितनी सच्ची बात है ये। जीवन की ऊंची-नीची डगर पर चलते हुए कब एक अजनबी इतना अपना हो जाता है पता ही नहीं चलता.... ..... सुख-दुख के साझेदार हुए, जीवनभर के साथ हुए। कानों में संगम के गीत प्रिये, तुम तो मेरे मीत प्रिये। आंसुओं से भीगे हुए, पलकों पर कुछ अद्भुत सपने, हमने जो आँखों में समां लिए, तुम तो मेरे मीत प्रिये। उजियाले का अधिकार लिए, मिटा तम के आकर्षण प्रिये। ढलते सूरज को दे आवाज़, हर हार को निरस्त करके, मुश्किलों में मुस्कान लिए, तुम तो मेरे मीत प्रिये। इस जीवन के गीतों के स्वर नहीं आसान प्रिये, जहां मिले स्वर हमारा मधुर वही संगीत प्रिये। चलते रहे अगर साथ यूं ही, हर मुश्किल है आसान प्रिये, तुम तो मेरे मीत प्रिये, जीवन का संगीत प्रिये.
टिप्पणियाँ
Behad khoobsoorat rachana!
आपकी कलम को शुभ कामनाएं
सब कुछ बदल गया ,
दिशा बदल गयी
रास्ते बदल गये ,
ख्वाहिशो के रंग उतरकर
नये रंगों में ढल गये ,
सुन्दर कविता है ज्योति जी. बधाई.
सब कुछ बदल गया ,
दिशा बदल गयी
रास्ते बदल गये ,
ख्वाहिशो के रंग उतरकर
नये रंगों में ढल गये ,
बहुत बढ़िया !
सुन्दर लेखन
सूरते भी आईने में बदलती नज़र आई.
रिश्तों के मायने
नई भूमिका सजाई !
वाह,ज्योति जी,
ज़माने के बदलते रंगों को आपने बहुत ही खूबसूरती से परिभाषित किया है !
सब कुछ बदल गया ,
दिशा बदल गयी
रास्ते बदल गये ,
ख्वाहिशो के रंग उतरकर
नये रंगों में ढल गये ,
बहुत सुंदर अभिव्यक्ति है ...रुख बदल जाने से जीवन में बहुत कुछ बदल जाता है।
सब कुछ बदल गया ,
दिशा बदल गयी
रास्ते बदल गये ,
ख्वाहिशो के रंग उतरकर
नये रंगों में ढल गये ,
सुन्दर लेख । वाकई, रुख हवाओ का बदले तो बदल जाती है ज़िन्दगी ।
सब कुछ बदल गया ,
दिशा बदल गयी
रास्ते बदल गये ,
ख्वाहिशो के रंग उतरकर
नये रंगों में ढल गये ,......
मनोभावों को खूबसूरती से पिरोया है। बधाई।
नई भूमिका सजाई ,
मोटे -मोटे अक्षरों को
हमने रेखांकित किया ,
सच्चाई को वयां करती आपकी यह रचना ....जीवन सन्दर्भों को उद्घाटित करती है ...आपका शुक्रिया