आज के दिन ही हम एक हुए थे....कितना लम्बा सफ़र तय कर लिया, याद ही नहीं। लगता है कल की ही तो बात थी........ अहसास कभी उम्र नहीं पाते , कितनी सच्ची बात है ये। जीवन की ऊंची-नीची डगर पर चलते हुए कब एक अजनबी इतना अपना हो जाता है पता ही नहीं चलता.... ..... सुख-दुख के साझेदार हुए, जीवनभर के साथ हुए। कानों में संगम के गीत प्रिये, तुम तो मेरे मीत प्रिये। आंसुओं से भीगे हुए, पलकों पर कुछ अद्भुत सपने, हमने जो आँखों में समां लिए, तुम तो मेरे मीत प्रिये। उजियाले का अधिकार लिए, मिटा तम के आकर्षण प्रिये। ढलते सूरज को दे आवाज़, हर हार को निरस्त करके, मुश्किलों में मुस्कान लिए, तुम तो मेरे मीत प्रिये। इस जीवन के गीतों के स्वर नहीं आसान प्रिये, जहां मिले स्वर हमारा मधुर वही संगीत प्रिये। चलते रहे अगर साथ यूं ही, हर मुश्किल है आसान प्रिये, तुम तो मेरे मीत प्रिये, जीवन का संगीत प्रिये.
टिप्पणियाँ
सच यदि शालीनता से कहो तो कोई नहीं मानता
और शोर व् हल्ला दे कर झूठ भी कहो तो सब मान लेते है
----देवेंद्र गौतम
वैसे एक शायर यूं भी फ़रमाते हैं-
इस दौर में जीना है तो कोहराम मचा दे
खामोश मिज़ाजी तुझे जीने नहीं देगी.
और हफ़ीज़ मेरठी साहब ये कह गए हैं
इल्तजा तो कोई भी सुनता नहीं
क्या करें, हम बेअदब हो जाएं क्या?
इन सबके बावजूद समाज में शांति ज़रुरी है और आपने एक सार्थक संदेश दिया है... बधाई.
kya khoob kataxh kiya hai .sach me ab yahi jamana aagaya hai.
kahte hai jiski lathi usi ki bhains .
bilkul aapki rachna par charitaarth hoti hai
bahut hi badhiya prastuti
badhai v dhanyvaad
poonam
शुभकामनायें आपको !!
accha laga aapka sath pakar .
Aabhar
मानव होना भाग्य है, कवि होना सौभाग्य है.
आपके ये शब्द बहुत सुकून देते ही जब भी आपके ब्लॉग तक आना होता है कई कई बार इसे पढता हूँ ,,दिल में सौभाग्यशाली होने की आरज़ू सी उठती है.