आस का दीपक

पतन से पहले

अंत बुराई का

निश्चय ही होता है ,

तब आस का दीपक

हरदम ही जलता है

यही वजह है

अंश यहां

मानवता का जिंदा है ,

घायल तो है

जमीर यहाँ 

पर वो शर्मिंदा है ।

टिप्पणियाँ

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