रविवार, 7 जुलाई 2019

मंजर

जरा ठहर कर देख तो लेते,

मंज़र क्या है आगे का !

बहुत जरूरी रहे संभलना ,

किसको पता इरादों का ! 

शनिवार, 11 मई 2019

गुमां नहीं रहा


जिंदगी का जिंदगी पे अधिकार नही रहा

इसीलिए उम्र का अब कोई हिसाब नही रहा ,

आज है यहाँ , कल जाने हो कहाँ

साथ के इसका एतबार नही रहा ,

मोम सा दिल ये पत्थर न बन जाये

हादसों का यदि यही सिलसिलेवार रहा ,

जुटाते रहें तमाम साधन हम जीने के लिए

मगर सांस जब टूटी साथ कुछ नही रहा ,

देख कर तबाही का नजारा हर तरफ

अब बुलंद तस्वीर का ख्वाब नही रहा ,

वर्तमान की काया विकृत होते देख

भविष्य के सुधरने का गुमां नही रहा ,

सोचने को फिर क्या रह जाएगा बाकी

हाथ में यदि कोई लगाम नही रहा l

शुक्रवार, 10 मई 2019

सन्नाटा....


चीर कर सन्नाटा

श्मशान का

सवाल उठाया मैंने ,

होते हो आबाद

हर रोज

कितनी जानो से यहाँ

फिर क्यों इतनी ख़ामोशी

बिखरी है

क्यों सन्नाटा छाया है यहाँ ,

हर एक लाश के आने पर

तुम जश्न मनाओ

आबाद हो रहा तुम्हारा जहां

यह अहसास कराओ .

सोमवार, 6 मई 2019

आदमी.....

आदमी जिंदगी के जंगल में

अपना ही करता शिकार है ,

फैलाता है औरो के लिए जाल

और फसता खुद हर बार है ।
.......................

रविवार, 28 अप्रैल 2019

युग परिवर्तन

युग परिवर्तन

न तुलसी होंगे, न राम

न अयोध्या नगरी जैसी शान .

न धरती से निकलेगी सीता ,

न होगा राजा जनक का धाम .

फिर नारी कैसे बन जाये

दूसरी सीता यहां पर ,

कैसे वो सब सहे जो

संभव नही यहां पर .

अपने अपने युग के अनुसार ही

जीवन की कहानी बनती है ,

युग परिवर्तन के साथ

नारी भी यहॉ बदलती है ।

शुक्रवार, 26 अप्रैल 2019

हम.......

हम ........

मै को अकेले रहना था

 हम को साथ चलना था

एक को खुद के लिए जीना था

 एक को सबके लिए जीना था ,

 इसलिए सबकुछ होते हुए भी  

मै यहाँ कंगाल रहा

 कुछ नही होते हुए भी

 हम मालामाल रहा ।

शुक्रवार, 19 अप्रैल 2019

आखिर ऐसा हुआ क्यों ?


आखिर ऐसा हुआ क्यो ?

सही ही गलत का है हकदार क्यों ?
बेगुनाह को ही सजा हर बार क्यों ?
गीता और कुरान का मान घटा क्यों ?
सच जानते हुए भी झूठ चला क्यों ?
यहाँ धर्म और ईमान डगमगाया क्यों ?
यहाँ गलत करने का डर मिट गया क्यों ?
न्याय के आसरे फिर रहे कोई क्यों ?
इंसाफ के लिए भटके इधर -उधर क्यों ?
खून की जंग चल रही है क्यों ?
खून का रंग बदल रहा है क्यो ?
मानवता का इतिहास पलट गया क्यों ?
सब कब कैसे बदल गया क्यों ?
ऐसा होना तो नही चाहिये ,फिर हुआ क्यों ?
यकीन को खोना तो नहीं चाहिए ,फिर खोया क्यों ?
इतने मजबूर हालात है क्यो ?
उलझे-उलझे सवाल है क्यो ?
सही ही गलत का है हकदार क्यो ?
बेगुनाह को ही सजा हर बार क्यो ?