
देखते
समझते
जानते हुए भी
वह कुछ नही बोला ,
बात कुछ अवश्य रही
तभी तो उसने
मुंह नही खोला l
मधुबन हो या गुलशन हो, पतझड़ हो या सावन हो, हर हाल में इंसां का एक फूल सा जीवन हो. हर पल जो गुज़र जाये, दामन को तो भर जाये, इस उम्र की राहों में खुशियों को चुराना है. हंसना ही जीवन है, हंसते ही जाना है.