शनिवार, 12 मार्च 2016

क़ातिल

सरेआम कत्ल कर के भी 
वो शर्मिंदा नही है ,
क्योंकि उसका कहना है 
वो कातिल नही है ।
कई बार सच भी आँखों का 
धोखा होता है ,
क़त्ल करने वाला यहाँ 
कातिल नहीं होता है ।

शुक्रवार, 11 मार्च 2016

हम ........

मै को अकेले रहना था
 हम को साथ चलना था
एक को खुद के लिए जीना था
 एक को सबके लिए जीना था ,
 इसलिए सबकुछ होते हुए भी 
मै यहाँ कंगाल रहा
 कुछ नही होते हुए भी

 हम मालामाल रहा ।

मै को अकेले रहना था हम को साथ चलना था एक को खुद के लिए जीना था एक को सबके लिए जीना था , तभी सबकुछ होते हुए भी मै यहाँ कंगाल रहा कुछ नही होते हुए भी हम मालामाल रहा ।

बुधवार, 23 सितंबर 2015

जिन्दगी महक जाती है जब उम्मीद खिलखिलाती है , वर्ना सूरते एक मुस्कान देखने के लिये तरस जाती . .................. जिन्दगी से जितना लड़ोगे जीवन मे उतना आगे बढ़ोगे . जिन्दगी मे जितना सहोगे समझ से उतना आगे रहोगे .

शनिवार, 12 सितंबर 2015

रहीम जी का एक दोहा है - जो रहीम उत्तम प्रकृति का करत सकत कुसंग-- चंदन बिष व्यापत नही लिपटे रहे भुजंग . बात तो सही है ,जो इस दोहे मे कही गई है ,पर उनके लिये जिनमे धैर्य अपार मात्रा मे व्याप्त हो ,क्योकि ये बात आज के समय मे जरा मुश्किल सी मालूम होती है , चंदन एक पेड़ है जो मौन रहता है साथ मे सजीव होते हुये भी निर्जीव के समान है ,इसके तन-मन के लिये कोई भी हरकत या बात बेअसर है ,इसलिये चंदन पर बिष चढ़ने या लिपटे रहने से कुछ नही होता ,परन्तु मनुष्य चंदन की तरह होकर भी चंदन नही रह सकता ,क्योकि वह एक सजीव ,संवेदनशील प्राणी है ,उसे गलत बाते विचलित कर देती है और वह परेशानियो मे अपना संतुलन एवं धैर्य खोने लगता है ,मन को समझाना -संभालना इतना आसान नही होता तभी मनुष्य दिशा भटक जाता है ,वो पूर्ण रूप से चंदन की तरह स्थिरता और सहनशीलता बनाये नही रह सकता ,विरोध करना उसकी प्रकृति है ,अन्याय के विरुद्ध आवाज उठाना आदत .इसलिये उत्तम प्रकृति वाले ही कुसंग के चपेट मे अधिक आ रहे है .

शुक्रवार, 11 सितंबर 2015

औरत हर कदम पर आजमाईश की सूरत होती है ढल जाये जो हर हालात मे ऐसी ये मूरत होती है .

शुक्रवार, 12 जून 2015

दिल ........

दिल सुनता रहा
दिल सहता रहा ,
सब्र का सिलसिला
बस यूही चलता रहा .
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खामोशी मे कई बातो का आगाज होता है
टूटने पर ही इस बात का अहसास होता है .
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