गुरुवार, 25 अगस्त 2011


हम -तुम -------
एक ही रास्ते के

दो मोड़ है ,

जो पलट कर

उसी राह ले आते है

जहां आरम्भ और अंत

एक हो जाते है ,

फिर सोचने की कही

कोई गुंजाइश नही

रह जाती ,

फैसले की कोई सुनवाई

हो ही नही पाती l

37 टिप्‍पणियां:

यशवन्त माथुर (Yashwant Mathur) ने कहा…

बहुत ही बढ़िया।

सादर

इस्मत ज़ैदी ने कहा…

bahut sundar !
waah !!

दिगम्बर नासवा ने कहा…

Prem ki raah mein Prem karne waale EK hi raaste ke do mod hote hain.... Sundar rachna hai....

संगीता स्वरुप ( गीत ) ने कहा…

अच्छी प्रस्तुति

वन्दना अवस्थी दुबे ने कहा…

क्या बात है!!

वन्दना ने कहा…

बहुत सुन्दर प्रस्तुति।

kshama ने कहा…

Nihayat sundar rachana!

Kunwar Kusumesh ने कहा…

इसीलिए तो कहते हैं की ये दुनिया गोल है.

प्रवीण पाण्डेय ने कहा…

समरसता का रंग अजब ही है।

Babli ने कहा…

बहुत ख़ूबसूरत रचना लिखा है आपने ! शानदार प्रस्तुती!
मेरे नए पोस्ट पर आपका स्वागत है-
http://seawave-babli.blogspot.com/
http://ek-jhalak-urmi-ki-kavitayen.blogspot.com/

डॉ॰ मोनिका शर्मा ने कहा…

Wah...Sunder

अल्पना वर्मा ने कहा…

sirshk heen kyun?

acchee likhi hai kavita.

Rakesh Kumar ने कहा…

क्या बात है ज्योति जी,
आपने अच्छी भूल भुलैया प्रस्तुत की है.
सुन्दर प्रस्तुति के लिए आभार.

Maheshwari kaneri ने कहा…

बहुत सुन्दर प्रस्तुति।

Sapna Nigam ( mitanigoth.blogspot.com ) ने कहा…

वहीं से शुरु , वहीं पे खतम , वाह क्या बात है !!

mahendra verma ने कहा…

अच्छे भाव, अच्छी पंक्तियां।

यशवन्त माथुर (Yashwant Mathur) ने कहा…

कल 05/09/2011 को आपकी यह पोस्ट नयी पुरानी हलचल पर लिंक की जा रही हैं.आपके सुझावों का स्वागत है .
धन्यवाद!

सदा ने कहा…

बहुत ही बढि़या ।

आशा ने कहा…

बहुत सुन्दर प्रस्तुति |बधाई
आशा

POOJA... ने कहा…

saargarbhit kavita...
atisundar...

आशीष/ ਆਸ਼ੀਸ਼ / ASHISH ने कहा…

हम तुम....
अच्छी रचना.
साधुवाद!
आशीष
--
मैंगो शेक!!!

अनामिका की सदायें ...... ने कहा…

thode me hi sab kuchh samjha diya. wah ji apko to judge hona chahiye tha.

S.M.HABIB (Sanjay Mishra 'Habib') ने कहा…

क्या बात है...
बहुत अच्छी रचना...
सादर...

प्रेम सरोवर ने कहा…

बहुत ही अच्छा लगा । मेरे पोस्ट पर आपका निमंत्रण है । धन्यवाद ।

NEELKAMAL VAISHNAW ने कहा…

Jyoti jee आपको अग्रिम हिंदी दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं. हमारी "मातृ भाषा" का दिन है तो आज से हम संकल्प करें की हम हमेशा इसकी मान रखेंगें...
आप भी मेरे ब्लाग पर आये और मुझे अपने ब्लागर साथी बनने का मौका दे मुझे ज्वाइन करके या फालो करके आप निचे लिंक में क्लिक करके मेरे ब्लाग्स में पहुच जायेंगे जरुर आये और मेरे रचना पर अपने स्नेह जरुर दर्शाए..
MADHUR VAANI कृपया यहाँ चटका लगाये
BINDAAS_BAATEN कृपया यहाँ चटका लगाये
MITRA-MADHUR कृपया यहाँ चटका लगाये

प्रेम सरोवर ने कहा…

ज्योति जी ,
बहुत दिनों के बाद आपके पोस्ट पर आया हूँ । सच कहा है आपने कि जीवन में कभी ऐसे मोड़ पर हम पहुँच जाते हैं जहां परिस्थितियां विवश सी कर देती हैं एवं हमें समानांतर रेखा के रूप में अपनी पहचान बना लेने के लिए बाध्य कर जाती हैं । धन्यवाद ।

Rakesh Kumar ने कहा…

मेरे ब्लॉग पर आईयेगा,ज्योति जी.

डॉ.भूपेन्द्र कुमार सिंह ने कहा…

bahut sunder anubhootiya ,aapko hardik dhanyavad.sader,
dr.bhoopendra singh
mp

Rajendra Swarnkar : राजेन्द्र स्वर्णकार ने कहा…





आपको सपरिवार
नवरात्रि पर्व की बधाई और शुभकामनाएं-मंगलकामनाएं !

-राजेन्द्र स्वर्णकार

हास्य-व्यंग्य का रंग गोपाल तिवारी के संग ने कहा…

Bahut badhiya rachna

Rakesh Kumar ने कहा…

ज्योति जी, आपको बहुत मिस कर रहे हैं हम.

दीपावली और गोवर्धन की हार्दिक शुभकामनाएँ.

जल्दी दर्शन दीजियेगा जी.

Rakesh Kumar ने कहा…

आपका बहुत दिनों से कोई समाचार नही मिला है.
परन्तु आज आपको प्रवीण जी के ब्लॉग पर देखकर बहुत खुशी मिली मुझे.

आशा है आप स्वस्थ और कुशल मंगल से होंगीं.
समय मिलने पर मेरे ब्लॉग पर भी आईयेगा.

amrendra "amar" ने कहा…

बहुत सुन्दर प्रस्तुति

अनामिका की सदायें ...... ने कहा…

bahut dino baad aapka agman dekh man prasann ho gaya. sunder abhivyakti.

मनीष सिंह निराला ने कहा…

behad satik kahi hain aapne.
sundar prastuti.

dheerendra ने कहा…

बहुत सार्थक प्रस्तुति, सुंदर रचना,बेहतरीन पोस्ट....
new post...वाह रे मंहगाई...

Saras ने कहा…

वाह ज्योतिजी