गुरुवार, 9 जनवरी 2014

जरा  ठहर  कर  देखते  है  
मंज़र  क्या  है  आगे  का  ,
बहुत  जरूरी  है  संभलना 
पता  चलता  नहीं  इरादो  का। 

7 टिप्‍पणियां:

Alpana Verma ने कहा…

नया साल शुभ हो ज्योति.बहुत दिनों बाद दिखाई दी हैं.चित्र और कविता की पंक्तियाँ दोनों सुन्दर !

शीर्षक नहीं दिया कविता को?

Rakesh Kumar ने कहा…

सुन्दर कविता.
वास्तव में ठहर कर देखना
और संभलकर चलना जरुरी है.

शुभकामनाएँ ज्योति जी.

संजय भास्‍कर ने कहा…

बहुत सुंदर प्रस्तुति

Anju (Anu) Chaudhary ने कहा…

नया साल सबके लिए शुभ हो

गिरिजा कुलश्रेष्ठ ने कहा…

सही कहा आपने । नववर्ष की हार्दिक शुभकामनाएं ।

Digamber Naswa ने कहा…

संभालना जरूरी है जीवन में ... कदम कदम पे दुश्वारियां होती हैं ...

Satish Saxena ने कहा…

जरा ठहर कर देख तो लेते, मंज़र क्या है आगे का !
बहुत जरूरी रहे संभलना ,किसको पता इरादों का !

कमाल के भाव हैं ! प्रभावशाली . . .