मंगलवार, 2 दिसंबर 2014

रहमत है उस खुदा की
गुजर हो रहा है ,
हर हाल मे यहां सबका
बसर हो रहा है .
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जिस बात पर यकीन
कभी होता नही था
उस बात पर यकीं
अब हो रहा है .
...........
इतनी घनी आबादी
और आदमी अकेला
कहने को उसे अपना
कोई नही मिल रहा है .
"'''''''
आदमी अठन्नी और
खर्चा रुपया
शौक इस कदर हमे
ले डूब रहा है .
ुुुुुुुुुुुुुुुुुुुुुुुुु
मकान का नक्शा कुछ
इस तरह बनने लगा है
जो जमीन पर था वो
आसमान पर बस रहा है .
,,,,,,,,,
वाकई मे दुनिया
बहुत बदल गई
इस बात का इल्म
हमे हो रहा है .



4 टिप्‍पणियां:

Digamber Naswa ने कहा…

बहुरत खूब ... देखते देखते दुनिया बदल जाती है पता ही नहीं चलता ....
लाजवाब लिखा है ...

अल्पना वर्मा ने कहा…

ब्लॉग खोलते ही एक सुन्दर फूल स्वागत करता है ..और अब पढ़ीं ये रचनाएँ. बहुत बढ़िया लिखी हैं.शीर्षक भी कुछ होता तो अच्छा था.

Vinay Singh ने कहा…

मुझे आपका blog बहुत अच्छा लगा। मैं एक Social Worker हूं और Jkhealthworld.com के माध्यम से लोगों को स्वास्थ्य के बारे में जानकारियां देता हूं। मुझे लगता है कि आपको इस website को देखना चाहिए। यदि आपको यह website पसंद आये तो अपने blog पर इसे Link करें। क्योंकि यह जनकल्याण के लिए हैं।
Health World in Hindi

संजय भास्‍कर ने कहा…

बहुत पसन्द आया
हमें भी पढवाने के लिये हार्दिक धन्यवाद
बहुत देर से पहुँच पाया ....माफी चाहता हूँ..