शनिवार, 18 अप्रैल 2009

अहसास.........


धीरे-धीरे यह अहसास हो रहा है,
वो मुझसे अब कहीं दूर हो रहा है।
कल तक था जो मुझे सबसे अज़ीज़,
आज क्यों मेरा रकीब हो रहा है।
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इन्तहां हो रही है खामोशी की,
वफाओं पे शक होने लगा अब कहीं।
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जिंदगी है दोस्त हमारी,
कभी इससे दुश्मनी,
कभी है इससे यारी।
रूठने -मनाने के सिलसिले में,
हो गई कहीं और प्यारी ।

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इस इज़हार में इकरार

नज़रंदाज़ सा है कहीं,

थामते रह गए ज़रूरत को,

चाहत का नामोनिशान नहीं.

7 टिप्‍पणियां:

wwwvandanaadubeyblog ने कहा…

ब्लौग जगत में आपका स्वागत है.....शुभकामनायें.

sifar ने कहा…

Mrs. Jyoti, kya hai ye?
Sahi mein....bahut...bahut khoobsurati se shabdon ko piroya hai, apni bhawnaon ke saath.

Aur khaas baat to dekhiye, ise hi shayad bahut kam logon ne padha hai.....:)

Ho sake to repost zaroor kariyega. Mujhe pura bharosa hai sabko bahut pasand aayega.

Sifar

ज्योति सिंह ने कहा…

main puraani post kholi nahi kabhi aaj man kiya pichhali rachanaa dekhane ka to aapko vicharo ke saath yahan dekh achchhaa laga .aap aarambh me pahunch gaye aur saraha bhi shukriya bahut bahut .sifar ji .

यशवन्त माथुर (Yashwant Mathur) ने कहा…

कल 09/08/2011 को आपकी एक पोस्ट नयी पुरानी हलचल पर लिंक की जा रही हैं.आपके सुझावों का स्वागत है .
धन्यवाद!

अनुपमा त्रिपाठी... ने कहा…

inhin ehsaason ke sath badh raha hai jeevan .....
shubhkamnayen.

सदा ने कहा…

वाह ...बहुत ही बढि़या ।

संगीता स्वरुप ( गीत ) ने कहा…

अच्छे अशआर प्रस्तुत किये हैं