बात अपनी होती है तब जीने की उम्मीद को रास्ते देने की सोचते है वो , बात जहाँ औरो के जीने की होती है , वहाँ उनकी उम्मीद को सूली पर लटका बड़े ही आहिस्ते -आहिस्ते कील ठोकते हुये दम घोटने पर मजबूर करते है । रास्ते के रोड़े , हटाने की जगह बिखेरते क्यों रहते हैं ? ........................................ इसका शीर्षक कुछ और है मगर यहाँ मैं बदल दी हूँ क्योंकि यह एक सन्देश है उनके लिए जो किसी भी अच्छे कार्य में सहयोग देने की जगह रोक -टोक करना ज्यादा पसंद करते .
कितने सुलझे फिर भी उलझे , जीवन के पन्नो में शब्दों जैसे बिखरे । जोड़ रहे जज्बातों को तोड़ रहे संवेदनाएं , अपनी कथा का सार हम ही नही खोज पाये । पहले पृष्ठ की भूमिका में बंधे हुए है , अब भी , अंत का हल लिए हुए आधे में है अटके । और तलाश में भटक रहे अंत भला हो जाये , लगे हुए पुरजोर प्रयत्न में यह कथा मोड़ पे लाये ।
एकांत का संसार स्मृतियों में डूबा...भला, बुरा सोचता प्रश्नों से जूझता...हलों को ढूंढ़ता कल को खोजता...आज में जीता आस को जगाता...बिश्वास को सूली पे लटका हुआ कभी पाता टूटता, बिखरता...अंतर्मन के द्वन्द लिए जीतता तो कभी हारता दुख में उदास होकर...रोता बिलखता सुख का ध्यान कर...हँसता मुस्कुराता भविष्य की चिंता करता कभी परिस्थितियों पे...विचार करता थोड़ा सामने जाता...फिर पीछे हट जाता अकेले रहने पर मनुष्य.. स्वाभाविक रूप से विचारों में उलझा रहता हैं मौन व्रत धारण किए कई किस्से गढ़ता हैं, स्वतंत्र रूप से जीता.... वो अपनी जिस दुनिया में वही हैं.....उसका अपना संसार एकांत का संसार जो देता हैं जीवन को विस्तार... ज्योति सिंह 🙏🙏
टिप्पणियाँ
ख्वाब कब्र खोद कर ही उडान भरते हैं .......!!
बधाई
कल्पना है ,
जो हर वक़्त
कब्र खोद कर ही
ऊँची उड़ान भरती है ,
क्योंकि
उसका दम तोड़ना
निश्चित है ।
बहुत सुन्दर.
bahut badhiya!
बधाई.
ख्वाब एक
निराधार
बेल की तरह,
कल्पना है ,
जो हर वक़्त
कब्र खोद कर ही
ऊँची उड़ान भरती
Chhoti-si yah rachna,kitni vilakshan badi aur gahari baat kahti hai!