मंगलवार, 8 जून 2010

गुजारिश


दुर्घटनाओ की उठी लहरों को
फना करो ,
आकांक्षा की वधू को
सँवरने दो ,
उठे ऐसी आंधी कोई
कश्ती का रुख मोड़ दे ,
उमंग भरी मौज की कश्ती
साहिल पे आने दो ,
कारवां जब निगाहों में
जुस्तजू सिमटी हो बाँहों में ,
ऐसे खुशनुमा माहौल में
किसी तूफ़ान का ज़िक्र करो

17 टिप्‍पणियां:

kshama ने कहा…

Zaroor poori ho aisi sundar guzarish!

adwet ने कहा…

बहुत सुंदर ....

Suman ने कहा…

nice

M VERMA ने कहा…

ऐसे खुशनुमा माहौल में
किसी तूफ़ान का ज़िक्र न करो ।
वाकई माहौल जब खुशनुमा हो तो विसंगतियों का जिक्र भी फीका कर देती है
बहुत सुन्दर

मनोज कुमार ने कहा…

अच्छी प्रस्तुति।

संजय भास्कर ने कहा…

आपकी यह कविता बहुत पसंद आई है...धन्यवाद..

संजय भास्कर ने कहा…

सार्थक और बेहद खूबसूरत,प्रभावी,उम्दा रचना है..शुभकामनाएं।

इस्मत ज़ैदी ने कहा…

ज्योति जी ,
बहुत बढ़िया ,
आप की इच्छा सही है ,
माहौल को ख़ुश्गवार बनाना इंसान के अपने
हाथ में होता है

संगीता स्वरुप ( गीत ) ने कहा…

मन को छू गयी ये गुज़ारिश....बहुत बढ़िया

रश्मि प्रभा... ने कहा…

वाह...जबरदस्त रचना

दिगम्बर नासवा ने कहा…

ऐसे खुशनुमा माहौल में
किसी तूफ़ान का ज़िक्र न करो ..

सच है खुशियों की बात जब हो ... तो गम का ज़िक्र क्यों ... अच्छा लिखा है ....

रचना दीक्षित ने कहा…

कारवां जब निगाहों में
जुस्तजू सिमटी हो बाँहों में ,
ऐसे खुशनुमा माहौल में
किसी तूफ़ान का ज़िक्र न करो ।
ज्योति सिंह द्वारा 10:32 AM पर Jun 8,

वाह आप तो आते ही छा गयीं

Apanatva ने कहा…

mazaa aa gaya...........aisaa mood aapka bana rahe......
isee shubhkamna ke sath......

शोभना चौरे ने कहा…

nai asha ka snchar karti sundar kvita .

आशीष/ ASHISH ने कहा…

GUZARISH KUBOOL!
AUR KYUN NA HOGI.....
ITNI MAASOOM AUR KHOOBSOORAT JO HAI!
SAADAR VANDE!

अल्पना वर्मा ने कहा…

खुशनुमा माहोल बना रहे ..कोई ग़म ,कोई तूफान कभी पास न आये.
उमंग भरी मौज की कश्ती में सवार आकांशा की वधू खुशियों से यूँ ही चहकती रहे .
बहुत प्यारा सा अनुरोध है..

sandhyagupta ने कहा…

Aap is gujarish me hume bhi sath samajhiye.shubkamnayen.