सोमवार, 27 सितंबर 2010

छोटी छोटी रचनाये


जिंदगी यूं ही गुजरती है
यहाँ दर्द के पनाहों में ,
क्षण -क्षण रह गुजर करते है
पले कांटो भरी राहो में ।
....................................................
हर दिन गुजर जाता है
वक़्त के दौड़ में ,
आवाज विलीन हो जाती है
इंसानों के शोर में ।
,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,
वफ़ा तब मोड़ लेती है
जमाने के आगे ,
न जलते हो कोई जब
उम्मीदों के सितारे ।
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उन आवाजो में पड़ गई दरारे
जिन आवाजो के थे सहारे ।
>>>>>>>>>>>>>>>>>>>>>>>>
अपनो के शहर में
ढूँढे अपने ,
पर मिले पराये और
झूठे सपने ।
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अनामिका
के आग्रह पर बचपन की कुछ और रचनाये डाल रही हूँ ,जो दसवी तथा ग्यारहवी कक्षा की लिखी हुई है

31 टिप्‍पणियां:

Mrs. Asha Joglekar ने कहा…

WAH, 10 WEE 11 WEE ME ITANA ACHCHA LIKHATI THEEN BAHUT SUNDER.

Mrs. Asha Joglekar ने कहा…

WAH, 10 WEE 11 WEE ME ITANA ACHCHA LIKHATI THEEN BAHUT SUNDER.

Sunil Kumar ने कहा…

आगे आगे देखिये होता है क्या जब बचपन में यह हाल......बधाई

Suman ने कहा…

nice

Apanatva ने कहा…

bahut sunder rachanae hai.........
khushee ise baat ki bhee hai ki aap ne sambhal kar rakha....varna hum vanchit hee rah jate.
Aabhar

संजय भास्कर ने कहा…

कई रंगों को समेटे एक खूबसूरत भाव दर्शाती बढ़िया कविता...बधाई

निर्मला कपिला ने कहा…

बेशक लिख्क़ने मे छोटी रचना है मगर लेकिन भाव मे बहुत बडी है। छोटी सी उम्र मे इतना सुन्दर्! वाह। बधाई।

संगीता स्वरुप ( गीत ) ने कहा…
इस टिप्पणी को लेखक द्वारा हटा दिया गया है.
संगीता स्वरुप ( गीत ) ने कहा…

बहुत सुन्दर रचनाएँ ...

किसी के आग्रह पर और पाठकों को भी मिलीं रचनाएँ पढने के लिए ...'

अनामिका जी को शुक्रिया

रचना दीक्षित ने कहा…

वाह बचपन में इतना अच्छा लिख लेती थीं बधाई

शुक्रिया अनामिका

वीना ने कहा…

बहुत सही रचनाएं है...

वन्दना ने कहा…

वाह …………………बहुत ही सुन्दर हैं।

प्रवीण पाण्डेय ने कहा…

बड़ी सुन्दर रचनायें।

mahendra verma ने कहा…

अपनों के शहर में ढूंढे अपने
पर मिले पराए और झूठे सपने
बहु खूब...सुंदर पंक्तियां है ।

राज भाटिय़ा ने कहा…

बहुत ही खुबसुरत, रचनाऎ धन्यवाद

sandhyagupta ने कहा…

सभी क्षणिकाएं प्रभावित करती हैं.इतनी कम उम्र में भी आप इतना अच्छा लिखती थीं!

Udan Tashtari ने कहा…

छोटी छोटी किन्तु प्रभावी रचनायें..बहुत बधाई.

महफूज़ अली ने कहा…

बहुत अच्छी लगी आज की रचनाएं ...

शाहिद मिर्ज़ा ''शाहिद'' ने कहा…

बहुत खूबसूरत लिखती हैं आप...
कल भी और आज भी...
बधाई.

S.M.MAsum ने कहा…

जिंदगी यूं ही गुजरती है
यहाँ दर्द के पनाहों में ,
क्षण -क्षण रह गुजर करते है
पले कांटो भरी राहो में ।

Mashallah.

सत्यप्रकाश पाण्डेय ने कहा…

सुंदर रचना


यहाँ भी पधारें:-
ईदगाह कहानी समीक्षा

दिगम्बर नासवा ने कहा…

हर दिन गुजर जाता है
वक़्त के दौड़ में ,
आवाज विलीन हो जाती है
इंसानों के शोर में ...

बहुत सटीक कहा है .... दिन गुज़रता है ... शाम होती है ... जिंदगी यूँ ही तमाम होती है ....

शोभना चौरे ने कहा…

vah jyotiji
bahut sundar rachnaye hai matlb ab to aap nikhar par hai .
bahut khoob

शरद कोकास ने कहा…

छोटी छोटी मगर अच्छी अच्छी ।

RAJWANT RAJ ने कहा…

aavajo me draro ka pdna , bhut hi ghri soch , pathk ko bhi sochne pr mjboor kr dene layk ehssas .
jbbhi aisa kuchh samne likha milta hai to bar bar use dohrane ka mn krta hai .
shukriya .

Dr.Ajeet ने कहा…

उम्दा रचना...

अब आपको भी बुलाना पडेगा क्या अपने ब्लाग पर...! वैसे ही मुझ निर्धन के यहाँ इक्का-दुक्का लोग आते है आप कुछ समर्थन कर देती है तो मनोबल बढ जाता है...

आभार सहित
डा.अजीत

BrijmohanShrivastava ने कहा…

कंाटे भरी राह में जिन्दगी गुजारना एसा लगता है ’’ जिन्दगी से बडी सजा ही नहीं , और क्या जुर्म है पता ही नहीं’’ इन्सानो के शोर में आवाज विलीन हो जाती है । यह कितनी सटीक बात है कि जब उम्मीद का कोई सितारा जलता हुआ न हो तो वफा भी मुह मोड लेती है। जिन आवाजों का सहारा था उन्ही में दरारे पड गर्इ्र यह भी छोटी सी मगर बहुत उम्दा है

अल्पना वर्मा ने कहा…

वाह! वाह!
दसवीं ग्यारहवीं में भी इतना सुन्दर लिखा करती थीं आप..क्या बात है ज्योति!बधाई.

Mumukshh Ki Rachanain ने कहा…

उन आवाज़ों में पड़ गयी दरारें,
जिन आवाजों के थे सहारे

ऐसे कटु अनुभव का अहसास इतनी कम उम्र में, तब तो ता जिंदगी रचनाओं की सरिता बहती रहेगी,
कहा गया है....
वियोगी रहा होगा पहला कवि.....

सुन्दर, पूर्व की, पर कालातीत रचनाओं पर हार्दिक बधाई..........

चन्द्र मोहन गुप्त

Indranil Bhattacharjee ........."सैल" ने कहा…

आपतो उस वक्त भी बहुत अच्छी रचनाएँ लिखती थी ...

अनामिका की सदायें ...... ने कहा…

चलो इस बहाने तुम्हारी लड़कपन की रचनाये तो पढ़ने को मिले...शुक्रिया बहुत बहुत.