मंगलवार, 25 जनवरी 2011

आशाओ के दीप जलाये


हर बार ये कहते आये है
हर बार ये सुनते आये है ,
इस तिरंगे के नीचे हमने
बहुत से प्रण उठाये है
पर इस पर्व के जाते ही
हम सब बिसर जाते है ,
सिर्फ कोरे वादे करके ही
सच्चे देशभक्त बन जाते है
अपने वीरो जैसा जुनून
हम क्यों नही पैदा कर पाये ,
जो
देकर आहुति प्राणों की
इस देश की जान बचाये
धरती माँ के पोछे आंसू
सीना छलनी होने से बचाये ,
बनके उनके सच्चे सपूत
जीवन को सफल बनाये
हो हरियाली इस धरती पर
आशाओ के दीप जलाये
जय हिंद
सभी बंधुओ को गणतंत्र दिवस की हार्दिक बधाई ,सारे जहां से अच्छा हिन्दुस्तान हमारामजहब नही सिखाता आपस में बैर रखना ,प्राण मित्रो भले ही गवाना ,पर झंडा ये नीचे झुकानावन्दे मातरम् वन्दे मातरम वन्दे मातरम्

18 टिप्‍पणियां:

इस्मत ज़ैदी ने कहा…

सुंदर विचार !
गणतंत्र दिवस की हार्दिक बधाई

राज भाटिय़ा ने कहा…

अति सुंदर विचार.
आप को गणतंत्र दिवस की हार्दिक बधाई

Rajesh Kumar 'Nachiketa' ने कहा…

वास्तविकता के छींटे दिखाई दे रहे हैं....सुन्दर रचना...
गणतंत्र दिवस की बधाई.....

मनोज कुमार ने कहा…

गणतंत्र दिवस की हार्दिक बधाई! कविता में प्रस्तुत विचार अनुकरणीय हैं।

sagebob ने कहा…

बहुत बढ़िया.बधाई

Rajendra Swarnkar : राजेन्द्र स्वर्णकार ने कहा…

आदरणीया ज्योति सिंह जी
सस्नेहाभिवादन !

राष्ट्र भावना से ओत-प्रोत आपकी काव्य रचना के लिए आभार ! सुंदर भावनाओं की सुंदर प्रस्तुति के लिए बधाई !

गणतंत्र दिवस की हार्दिक बधाई और मंगलकामनाएं !

- राजेन्द्र स्वर्णकार

प्रवीण पाण्डेय ने कहा…

आपको भी गणतन्त्र की बधाईयाँ।

Mithilesh dubey ने कहा…

गणतंत्र दिवस की हार्दिक शुभकामनायें

हरकीरत ' हीर' ने कहा…

अपने वीरो जैसा जुनून
हम क्यों नही पैदा कर पाये ,
जो देकर आहुति प्राणों की
इस देश की जान बचाये ।

प्रेरणा से ओत-प्रोत रास्त्र प्रेम की पंक्तियाँ ....
ज्योति जी गणतंत्र दिवस की शुभकामनाएं ....!!

संगीता स्वरुप ( गीत ) ने कहा…

प्रेरणादायक रचना ...

गणतंत्र दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं

रेखा श्रीवास्तव ने कहा…

ati sundar vichar aur sandesh.

gantantra divas par hardik shubhakamanayen.

kshama ने कहा…

Behad sundar rachana! Bade dino baad likha hai aapne!
Gantantr diwas bahut,bahut mubarak ho!

रचना दीक्षित ने कहा…

बेहतरीन प्रस्तुती.सामायिक रचना, वो भी चंद पंक्तियों में बहुत कुछ

वन्दना अवस्थी दुबे ने कहा…

अपने वीरो जैसा जुनून
हम क्यों नही पैदा कर पाये ,
बहुत सुन्दर कविता है ज्योति. शुभकामनाएं भी.

शाहिद मिर्ज़ा ''शाहिद'' ने कहा…

ज्योति जी, अब तो बहुत जगह राष्ट्रीय पर्व भी औपचारिकता भर बनकर रह जाते हैं...
अच्छी रचना है.
गणतंत्र दिवस की शुभकामनाएं.

manav vikash vigyan aur adytam ने कहा…

nice jyoti ji aap ko badai

ज्ञानचंद मर्मज्ञ ने कहा…

सच्चाई का बोध कराती हुई सार्थक कविता !

दिगम्बर नासवा ने कहा…

इस गणतंत्र पर सही संदेश देती ... सोचने को मजबूर करती है आपकी पोस्ट...