सोमवार, 1 जून 2009

पहली बारिश

पहली बारिश की बूंदा -बांदी
रिमझिम -रिमझिम पानी की झड़ी ,
लिए पल -पल की आस
तपता मन रहा ,करता इंतज़ार ,
रिमझिम बारिश की ये शुरुआत
जगा गई ज्यो जीने की आस ,
प्रकृति ,पशु -पक्षी ,जन -जन ने
ली हो ज्यो राहत की साँस ,
खुशियों की सौगात लेकर
जैसे आई हो बरसात ,
बूंदा -बांदी की इस ठंडी रुत में
छमाछम करने बच्चे भी भागे ,
हो दुनिया की सभी शै फीकी
जैसे इस जीवन अमृत के आगे ,
खेत -खलिहानों में भी जागी
हरियाली की उमंग ,
शीतल जल की फुआर से
भर गया जब हर आँगन ,
पहली बारिश की झड़ी
आई ले खुशियों की घड़ी

3 टिप्‍पणियां:

Sifar ने कहा…

Bahut khoob kaha....

ज्योति सिंह ने कहा…

shukriya sifar ji .

woyaadein ने कहा…

आते-आते थोड़ी देर हो गयी, ठीक बादलों की तरह.
पहली बारिश का इंतज़ार करते हैं, सब पागलों की तरह.

शीतल कविता, वर्षा की रिम-झिम की तरह....

साभार
हमसफ़र यादों का.......