शुक्रवार, 13 नवंबर 2009

तनहा खामोश है ,अपनी महफ़िल में

ये खूबसूरत शमा ,

ढल जायेगी अश्को में लपेटे जिस्म

किसी वक्त गमगीन शमा

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जिंदगी को जिंदगी से है इतना प्रेम

सोचकर सिर्फ़ वो कजा से घबराती है ,

यही वज़ह लिए , परेशानियों में

मौत उसका साथ निभाती है

9 टिप्‍पणियां:

MANOJ KUMAR ने कहा…

बहुत भावुक अभिव्यक्ति।

राज भाटिय़ा ने कहा…

ज्योति जी, बहुत सुंदर रचनाये.
धन्यवाद

Shobhana ने कहा…

तनहा खामोश है ,अपनी महफ़िल में
ये खूबसूरत शमा
bahut khoob
achhi rachna

योगेश स्वप्न ने कहा…

wah jyoti ji gagar men sagar bhar diya.

Apanatva ने कहा…

maayus jindagee kee jhalak dard paida ker gai .

दिगम्बर नासवा ने कहा…

bahoot achee bhav liya rachna hai ...pareshaai mein mout ka khyaal aksar insaan ko aata hai ...
gahri abhivyakti hai ..

ज्योति सिंह ने कहा…

मैं दिल से आभारी हूँ आप सभी की ,धन्यवाद

Babli ने कहा…

बहुत सुंदर भाव और अभिव्यक्ति के साथ आपने शानदार रचना लिखा है !

रचना दीक्षित ने कहा…

jyoti ji bahut sunder bhav hain apke
dhnyavad
rachana