रविवार, 15 नवंबर 2009

कलम की ज़िद

करने लगी कलम आज शोर
शब्दों को रही तोड़-मरोड़,
कुछ तो हंगामा करो यार,
अच्छा नहीं यूँ बैठे चुपचाप।
कागज़ पे तांडव हो आज,
लगे विचारों के साथ दौड़,
मच जाए आपस में होड़।
मचला है, ख्यालों में जोश ,
उसे नहीं कुछ और है होश।
ले के नई उमंगों का दौर,
करने लगी कलम आज शोर।

17 टिप्‍पणियां:

M VERMA ने कहा…

कलम जब शोर करता है

धरा में अजोर करता है

बेहतरीन रचना

वन्दना अवस्थी दुबे ने कहा…

कलम जब शोर करती है तब कुछ न कुछ बेहतर रच ही जाता है.

MANOJ KUMAR ने कहा…

"कलम की ज़िद" का दिलचस्प है परिणाम

kshama ने कहा…

Aapkee qalam khoob zor shor ke saath chalti rahe..... 'zore qalam aur ziyada',aur ham lutf uthate rahen..!

Harkirat Haqeer ने कहा…

ज्योति जी आपकी कलम में यूँ ही जोश भरता रहे दुआ है .....!!

दिगम्बर नासवा ने कहा…

kalam jab shor karti hai ..... lajawaab rachna ka srajan hota hai .... bahut achee rachna ...

रचना दीक्षित ने कहा…

करती रहिये आप कलम से शोर

अकेली नहीं हैं आप उस ओर

हम भी कोशिश करेंगे पुर जोर

MUFLIS ने कहा…

aapki qalam ka chlaa jo zor
lafz.dr.lafz nikle kuchh aur
zingi ke saath ho jb baat to
rachnaao ka paltaa hi rahaa shor

योगेश स्वप्न ने कहा…

kalam ko hurdang karne dijiye
khayalon men rang bharne dijiye
kaun jaane kaisi rachna janm le
lafz ko kavita men dhalne dijiye.

jyoti ji achcha likha hai.maine nahin aapne.

BrijmohanShrivastava ने कहा…

उत्तम रचना ।शब्दों को तोडमोड कर हंगामा कर । कागज पर तांडव । वाकई कविता लिखने की होड ही तो लगी हुई है

Babli ने कहा…

वाह ज्योति जी बहुत सुंदर रचना लिखा है आपने ! हर एक पंक्तियाँ लाजवाब है! बहुत बढ़िया लगा!

ज्योति सिंह ने कहा…

itni pyaari tippani aur kalam ke safar me humsafar bankar chalne ke liye jo utsaah aaplogo ne dikhaya uske liye main dil se aabhari hoon ,aap sabhi ka shukriyaan bahut -bahut ,
yogesh ji ,rachna ji avam muflis ji aapki panktiyon ne char chand laga diya ,jise padh mujhe behad khushi hui .

Apanatva ने कहा…

aapakee is kalam kee chah ko daad denee hogee .sadaiv to ye aapke niyantran me rahatee hai aapko isake niyantran me kaisa laga kavita ke hee madhyam se bataiyega . Badhai

ज्योति सिंह ने कहा…

apanatava ji shukriyaan ,aapki ichchha poori karne ki koshish me hoon .

संजय भास्कर ने कहा…

हर एक पंक्तियाँ लाजवाब है
AATI SUNDER

संजय भास्कर ने कहा…

"कलम की ज़िद"
लाजवाब

SANJAY

अनूप शुक्ल ने कहा…

और हंगामा हो ही गया! वाह!