सोमवार, 2 नवंबर 2009

संगदिल

तुम तो पत्थर की मूरत हो

नज़र आते , अजंता की सूरत हो ,

जहां ्रेम तो झलकता बखूबी

पर अहसास नही जिन्दा कही भी ,

हर बात बेअसर है तुम पर

जो समझ से मेरे है ऊपर ,

हर बात पे आसानी से कह जाते

कोई फर्क नही पड़ता हम पर ,

इस हाड़ मांस के पुतले में

दिल तो नही ,रह गया कही पत्थर ?

तुम कह गए और हम मान गये

यहाँ बात नही होती ,पूरी दिलबर ,

क्या ऐसा भी संभव है

यह प्रश्न खड़ा ,मेरे मन पर ,

छोड़ो अब इसे जाने दो ,देखेंगे

क्या होगा आगे आने पर



17 टिप्‍पणियां:

kshama ने कहा…

Kitni takleef hotee hai jab ham tahe dilse pyaar karte agla seene me dil nahee patthar rakhta hai...asanise dil us sang dilse takra jaye to choor choor hee hoga!

शोभना चौरे ने कहा…

chodne par hi to ve ptthar dil ho jate hai .
antr dvnd krta nirnayk man .achi abhivykti.

अर्कजेश ने कहा…

पत्थरों के पत्थर होने की वजह एक फ़ूल भी हो सकता है ।
फ़ूल से एहसासों के पीच्हे शूल भी हो सकता है ।

राज भाटिय़ा ने कहा…

यह प्रश्न खड़ा ,मेरे मन पर ,
छोड़ो अब इसे जाने दो ,देखेंगे
क्या होगा आगे आने पर ।
बहुत गहरे भाव लिये हैआप की यह रचना.
धन्यवाद

Harkirat Haqeer ने कहा…

छोडो अब इसे जाने दो
देखेगें क्या होगा आगे आने पर ....

कोई दर्द छुपा है पंक्तियों में जो भोगने के लिए तैयार खडा है ......!!

Apanatva ने कहा…

is dour se gujarana takleef deh hota hai tal mel jeevan kee aavshyakta hai . dardeelee rachana man ko bheega gai .

रश्मि प्रभा... ने कहा…

dard badhta hai,par yahi sangdil jivan ka ek alag tazurbaa de jata hai........bahut badhiyaa

योगेश स्वप्न ने कहा…

prateeksha karen hum bhi agli rachna ki.

दिगम्बर नासवा ने कहा…

सच में अगर कोई patthar हो jaaye तो कोई क्या कर sakhat है ....... अच्छी रचना है दर्द का ehsaas लिए .....

VIJAY TIWARI " KISLAY " ने कहा…

गहरे एहसास हैं आपकी रचना में ज्योति जी.
मन के किसी कोने को झंकृत सी करती रचना .
- विजय

ARUNA ने कहा…

अद्भुत रचना हमेशा की तरह!

Babli ने कहा…

वाह ज्योति जी लाजवाब रचना लिखा है आपने! आपकी तारीफ के लिए अल्फाज़ कम पर गए! बहुत ही सुंदर रचना!

Apoorv ने कहा…

छोड़ो अब इसे जाने दो ,देखेंगे
क्या होगा आगे आने पर ।
..एक गहन आशावाद, बेफ़िक्री, बेतकल्लुफ़ी और आत्मविश्वास !!!

satish kundan ने कहा…

तुम तो पत्थर की मूरत हो
नज़र आते , अजंता की सूरत हो ,
जहां प्रेम तो झलकता बखूबी
पर अहसास नही जिन्दा कही भी...bahut gahre bhav liye ye aapki rachna jaise kisi se sikyat kar rahi hai..wo bhi itne mithi bhasa me....mere blog par aapka swagat hai...

ज्योति सिंह ने कहा…

aap sabhi logo ki aabhaari hoon jo aakar utsaah vardhan kiya ,aur tahe dil se shukriya karti hoon aap logo ka .

रंजना [रंजू भाटिया] ने कहा…

आशा .सकारात्मक सोच लिए हुए है यह रचना ..आप बहुत अच्छा लिखती है .शुक्रिया

संजय भास्कर ने कहा…

बहुत ही अच्‍छी कविता लिखी है
आपने काबिलेतारीफ बेहतरीन


SANJAY KUMAR
HARYANA
http://sanjaybhaskar.blogspot.com