शनिवार, 19 दिसंबर 2009

हर कदम संभलकर उठाती है जिंदगी

दर्द में गुजर गई ये जिंदगी

अब तो गिला भी नहीं जिंदगी


उम्र भी रही कहाँ ,अब शिकायत की

बोलते -बोलते अब चुप हो गई जिंदगी


भागते -भागते थक चुकी अब ये जिंदगी

जाते -जाते वक़्त को पकड़ रही अब जिंदगी


किस सूरत पर ख्वाहिशों के महल बने

दूसरे जहां के इन्तजार मे जहाँ जिंदगी


उम्मीद ने किया इस तरह बेसहारा यहाँ ,

कि दहलीज पे इसे ,नहीं आने देती जिंदगी


वक़्त हुआ आइने के सामने आये हुए

अब तो सूरत मिलाने से कतराती है जिंदगी


गुजरे वक़्त से भी , अब नहीं है गुजरती

खोने का अहसास दिलाती इसे जिंदगी


भूले से भी अतीत मे अब झांकती नहीं

ढलती उम्र का आभास दिलाती जिंदगी


इतने हादसों से गुजर गई है कही ,कि

हल्की आहट पे ही सहम जाती जिंदगी


फरेब से सामना हुआ है ,इसका इतना

हर सच पर प्रश्न चिन्ह लगाती है जिंदगी

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ये मेरी पुरानी रचना है ,कई महीनो से सोचकर भी डाल नहीं पा रही थी इसका कारण रहा इतनी लम्बी रचना लिख तो लेती हूँ मगर ब्लॉग पर इतनी लम्बी रचना लिख पाना मेरे लिए मुमकिन नहीं ,तभी लेख भी चाहते हुए नहीं लिख पाती ,आज सोचा भी नहीं ,फिर भी लिख रही हूँ ,देखूं कोशिश किस राह ले जाती है ,कभी लगता है ऐसी रचना लिखना ठीक भी हैएक हकीकत एक सच्चाई ,कुछ आशा कुछ निराशा ,बाँध रही जिंदगी अपनी इनसे परिभाषा

24 टिप्‍पणियां:

Apanatva ने कहा…

OLD IS GOLD इस कहावत को चरितार्थ करती हुई रचना.
पूरी तौर से मन को भिगो गई आपकी ये भावुक रचना .
कहते है कि आग मे तप कर सोना और चमकता है.
यंहा असर रचनाओ पर हो रहा है . :)

Apanatva ने कहा…

OLD IS GOLD इस कहावत को चरितार्थ करती हुई रचना.
पूरी तौर से मन को भिगो गई आपकी ये भावुक रचना .
कहते है कि आग मे तप कर सोना और चमकता है.
यंहा असर रचनाओ पर हो रहा है . :)

मनोज कुमार ने कहा…

इतने हादसों से गुजर गई है कही ,कि
हल्की आहट पे ही सहम जाती जिंदगी ।
रचना अच्छी लगी।

kshama ने कहा…

Saara nichad likh daala aapne zindagee ka..!Alfaaz kee mohtaaji to meree ho jatee hai,jab aapko padhtee hun!

"Bikhare Sitarepe" aapki zarranawazikee shukrguaar hun!

योगेश स्वप्न ने कहा…

achha kiya aapne post kar di varna hum isse mehroom rah jaate.

दिगम्बर नासवा ने कहा…

बहुत लाजवाब ........ बेमिसाल है आपकी रचना ......... जीवन को बहुत करीब से देख कर लिखी है ..........

Anamika ने कहा…

aapki rachna bahut acchhi hai..zindgi ke dard,shikayto,thakan,khwahisho, umeedo,yaado,ateet aur yatharth ki dhara par pair rakhne tak ke saare ehsaas piro diye hai aapne isme..

ek ek line bahut khoobsurat ban padi hai.shukriya post karne ka.

रचना दीक्षित ने कहा…

इतने हादसों से गुजर गई है कही ,कि
हल्की आहट पे ही सहम जाती जिंदगी ।

फरेब से सामना हुआ है ,इसका इतना
हर सच पर प्रश्न चिन्ह लगाती है जिंदगी ।
समझ नहीं आता की किस लाइन पर कुछ लिखूं इस पर ना लिखूं .हर बात सोलह आने सच है और आईने की तरह साफ़ .बहुत बहुत बधाई इस सुंदर प्रस्तुति पर

शोभना चौरे ने कहा…

jindgi ke bare itna kuch kh diya hai aapne ki "aur kya baki hai jindgi "
bahut achhi rachna .

संजय भास्कर ने कहा…

बहुत सुंदर और उत्तम भाव लिए हुए.... खूबसूरत रचना......

ajit.irs62 ने कहा…

JYOTI JI ..RACHANA KO PADHNE ME AANAND AAYA...
-AJIT

अर्कजेश ने कहा…

वाह वाह । क्‍या खूब कहा है । बहुत बढिया ।

उम्र भी रही कहाँ ,अब शिकायत की
बोलते -बोलते अब चुप हो गई जिंदगी ।

इतने हादसों से गुजर गई है कही ,कि
हल्की आहट पे ही सहम जाती जिंदगी ।

फरेब से सामना हुआ है ,इसका इतना
हर सच पर प्रश्न चिन्ह लगाती है जिंदगी ।

अल्पना वर्मा ने कहा…

इतने हादसों से गुजर गई है कही ,कि
हल्की आहट पे ही सहम जाती जिंदगी ।

waah!
Jyoti ji yah to aap ki bahut achhcee rachana hai.

bhaavporn..aur har sher bahut khubsurat!

योगेन्द्र मौदगिल ने कहा…

Wahwa...

JHAROKHA ने कहा…

इतने हादसों से गुजर गई है कही ,कि
हल्की आहट पे ही सहम जाती जिंदगी ।

फरेब से सामना हुआ है ,इसका इतना
हर सच पर प्रश्न चिन्ह लगाती है जिंदगी ।
Jeevan ke yatharth ko prastut karatee samvedanapoorn abhivyakti.
Poonam

RAJ SINH ने कहा…

हर प्रश्न पर सच कह देने की ताकत है ज़िंदगी
वक़्त को मुट्ठी में बांधे चल चला चल ज़िंदगी .
आपकी इस शायिरी की शान में जोड़ रहा हूँ और भी .......

उम्र का शिकवा कहाँ ? कैसा ?ये अनुभव की डगर .
आईने से ज़िन्दगी की बात कहती ज़िन्दगी .

बहुत ही अंतरतम से निकली कविता जो मनो तक सीधी पहुँच जाये .
बहुत सुन्दर !

ज्योति सिंह ने कहा…

aap sabhi logo ka tahe dil se shukriyaan ,sabki tippani ek chhap man par chhod gayi ,jo umra ke har mod par hausala badhati rahegi ,

'अदा' ने कहा…

इतने हादसों से गुजर गई है कही ,कि
हल्की आहट पे ही सहम जाती जिंदगी

ये पंक्तियाँ मुझपर ही लागू हो रहीं हैं...
पूरी कविता खूबसूरत...
ज्योति,
आपका उलाहना बहुत अपना सा लगा...
हाँ मेरी गलती है ...देर हुई है मुझे आने में....
कोई बहाना नहीं करुँगी ...न ही कोई सफाई दूंगी....
बहुत अच्छा किया आपने तो मुझे बता दिया....अपनों का यही तो फायदा है....गलतियों से उबार देते हैं...
माफ़ी नहीं मांगूंगी...अपनों से कोई माफी मांगता है भला !!
स्नेह सहित..
'अदा'

अमिताभ श्रीवास्तव ने कहा…

दर्द में गुजर गई ये जिंदगी
अब तो गिला भी नहीं जिंदगी
jab jindagi gujar jaati he tab gila-shikave jesa rah bhi kuchh nahi jaataa.
kintu bahut satik aour gahree baate likhi he aapne, yakinan saarthak.

संजय भास्कर ने कहा…

सुन्दर कवितायें बार-बार पढने पर मजबूर कर देती हैं. आपकी कवितायें उन्ही सुन्दर कविताओं में हैं.

sandhyagupta ने कहा…

Aapki rachnayen dil me utar jati hain.Badhai.

ज़ाकिर अली ‘रजनीश’ ने कहा…

Saade aur sundar bhaav.


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वन्दना अवस्थी दुबे ने कहा…

क्या कहूं और कहने को क्या रह गया....सबने सब कह दिया..अपनी विलम्बित गति ( आने की) पर शर्मिन्दा हूं. बहुत सुन्दर और सार्थक गज़ल है.

ज्योति सिंह ने कहा…

bahut hi achchha laga aap sabhi ka yahan aana ,man se aabhari hoon ,jo hausala bahdaya mera