सोमवार, 15 मार्च 2010

पहचान ......













मेरा वास्ता इंसानियत से रहा


अहम से नही ,

मैं साधारण ही रहना चाहती

बड़े होने की ख्वाहिश

कतई नही ,


मेरी नजरों ने कितने ही


नाम वालों के चेहरे पढ़े ,



जो पहचान अपनी


अब भी ढूँढ रहे है ।



शोहरत की सोहबत में

वजूद ही कही उनके ,

गुमनाम से हो गये ।

अनगिनत रिश्तों में भी

तन्हाई है रौंद रही ,

क्योंकि उनकी तलाश

मंजिल के आगे भी है ,

किसी उस शक्स की

जो नाम से नही

पहचान कायम करे ,

बल्कि इंसानियत की

नींव बनाये ।

19 टिप्‍पणियां:

संजय भास्कर ने कहा…

तन्हाई है रौंद रही ,
क्योंकि उनकी तलाश
मंजिल के आगे भी है ,
किसी उस शक्स की
जो नाम से नही
पहचान कायम करे ,
बल्कि इंसानियत की
नींव बनाये ।

सुंदर शब्दों के साथ.... बहुत सुंदर अभिव्यक्ति....

संजय भास्कर ने कहा…

मेरे पास शब्द नहीं हैं!!!!

tareef ke liye..

शरद कोकास ने कहा…

इसी साधारण होने में जीवन का सौन्दर्य है । अच्छी रचना ।

शरद कोकास ने कहा…

इसी साधारण होने में जीवन का सौन्दर्य है । अच्छी रचना ।

ज्योति सिंह ने कहा…

एक अंदाज में आना ये तो मजेदार बात हुई ,शुक्रिया संजय जी और शरद जी हौसला बढ़ाने के लिए .

राज भाटिय़ा ने कहा…

मेरा वास्ता इंसानियत से रहा
अहम से नही ,
मैं साधारण ही रहना चाहती
बड़े होने की ख्वाहिश
कतई नही ,
वाह ज्योति जी आप की यह रचना दिल को छू गई.
धन्यवाद

Suman ने कहा…

nice

रचना दीक्षित ने कहा…

काश हर कोई ऐसे ही साधारण बने रहने की ठान ले तो शायद समस्याओं का तो निदान ही हो जाये.बधाई इस सुन्दर और सकारात्मक सोच के लिए

अल्पना वर्मा ने कहा…

शोहरत की बुलंदियों पर भी पहुँच कर अगर व्यक्ति ज़मीं से जुड़ा रहे तो अपनी पहचान नहीं भूलता.नहीं तो खुदको तलाशने में उम्र गुज़र जाती है .अच्छी कविता .

मनोज कुमार ने कहा…

बेहतरीन। बधाई।

योगेश स्वप्न ने कहा…

behtar bhav , behatareen abhivyakti.

Kishore Choudhary ने कहा…

शरद भाई सही कहते हैं, कविता पसंद आई.

Apanatva ने कहा…

Jyoteejee ye andaz bahut pasand aaya.....jindgee jeene ka naam hai.sakaratmak sochaaj ke sath kal bhee savar detee hai........:)

singhsdm ने कहा…

रचना के लिए एक ही शब्द काफी है............"बेहतरीन" !

अनामिका की सदाये...... ने कहा…

insaniyat ka path padhate hai..lekin fir bhi insan insan nahi rahta...shohrat ke andhad k peeche bhaagta rahta he din raat...kash har insan samajh paye ki insaniyat dikhao..shohrat khud-b-khud tumhare kadam choomegi.

achhi rachna.
badhayi.

Ravindra Ravi ने कहा…

बहुत हि गहराई है आपकी पंक्तियो में.शब्द नही सुझ रहे.

kshama ने कहा…

Jyotiji, bahut,bahut sundar rachana!

ज्योति सिंह ने कहा…

shukriyaa sabhi ka tahe dil se

दिगम्बर नासवा ने कहा…

इंसानियत जिंदा रही तो जमाना ख़ुशगवार हो जाएगा ... अच्छी रचना है ...