गुरुवार, 4 मार्च 2010

आशा की किरण



तुम दुआ हो हमारे


या अँधेरी रात में


जगमगाते सितारे ,


हवा से जहाँ


बुझ गए दिए ,


वहां जुगनू बन


राह रो़शन किए ,


तुम्हारी


हक अदायगी


दीवानगी पे ,


हमने सर ही नही ,


दिल भी झुका दिये

14 टिप्‍पणियां:

Apanatva ने कहा…

bahut khoobsoorat ahsas bharee rachana badee pyaree lagee .

kshama ने कहा…

Saral,sadagi bhari bhasha,man moh leti hai!

संजय भास्कर ने कहा…

हर शब्‍द में गहराई, बहुत ही बेहतरीन प्रस्‍तुति ।

संजय भास्कर ने कहा…

वाह ...ज्योति जी गज़ब का लिखतीं हैं आप .......!!

Suman ने कहा…

nice

शरद कोकास ने कहा…

सर इतना झुका कि दिल के पास आ गया।

रचना दीक्षित ने कहा…

बहुत अच्छी पोस्ट हम तो आपकी रचना पर भी सर और दिल दोनों झुका रहे हैं

शाहिद मिर्ज़ा ''शाहिद'' ने कहा…

......तुम्हारी हर अदा व दीवानगी पर
हमने सर ही नहीं दिल भी झुका दिये...
.वाह ज्योति जी, वाह ...ये बहुत खूब हैं

इस्मत ज़ैदी ने कहा…

ज्योति जी ,बहुत सुंदर,कैसे आ जाते हैं ऐसे विचार
और कैसे उसे शब्द दे देती हैं आप ,बधाई हो

ज्योति सिंह ने कहा…

shukriyaa tahe dil se ,aabhari hoon aap sabhi ki

रश्मि प्रभा... ने कहा…

वह खुदा ही है.....सजदे में सर झुका रौशनी का मान किया

दिगम्बर नासवा ने कहा…

जो जीवन में राह दिखाए उसके सामने सर झुकाना ही चाहिए ,... अच्छा लिखा है ..

अनामिका की सदाये...... ने कहा…

jyoti ji aapki post ki ye lines
हमने सर ही नही ,
दिल भी झुका दिये

padh kar ek gane k bol yaad aa gaye...

neeva (jhuk) ho ke chal o bandeya (insan)....
neeviya nu (jhuke huo ko) rab milda..

तुम दुआ हो हमारे
या अँधेरी रात में
जगमगाते सितारे ,

ye apni apni soch k upar hai...

acchi positive attitude deti rachna.

Kishore Choudhary ने कहा…

तुम दुआ हो हमारी या अँधेरी रात में जगमगाते सितारे... बहुत बढ़िया कुछ ही शब्दों में बहुत कुछ कह दिया है