शुक्रवार, 18 फ़रवरी 2011

चंद सवाल है जो चीखते ......


तेरे मेरे दरम्यान सभी रास्ते यकायक बंद हो गये
क्या कहे ,न कहे हम इस सवाल पर ठहर गये

हम जानते है ये खूब ,दगा फितरत मे नही तुम्हारे
कोशिश तो की मिटाने की ,मगर दाग फिर भी रह गये

हर उदासी मे बढ़कर तुम्हे गले लगाना चाहा
कुछ चुभने लगा तभी ,और कदम ठहर गये

सब कुछ ख़ामोशी मे दबकर तो रह गया
मगर चंद सवाल है ,जो चीखते रह गये

हर बात गहरे यकीन का अहसास दिलाती है
पर वो नही कभी कर पाये जो तुम कह गये

36 टिप्‍पणियां:

अल्पना वर्मा ने कहा…

दर्द और कसक भरी रचना .....
चंद सवाल बहुत परेशान किया करते हैं...

अच्छा लिखा है ज्योति .

राज भाटिय़ा ने कहा…

सब कुछ ख़ामोशी मे दबकर तो रह गया
मगर चंद सवाल है ,जो चीखते रह गये ।
कविता पढ कर एक ठंडी आह दिल से गहरे निकली... बहुत अच्छी रचना.

sagebob ने कहा…

उम्दा रचना.
दगा और दाग.बहुत सुन्दर.
और सब से बढ़िया शेर...

सब खामोशी में दब कर रह गया
मगर चंद सवाल हैं जो चीखते रह गए

आपकी कलम को सलाम.

संजय भास्कर ने कहा…

आदरणीय ज्योति जी
नमस्कार !
विचारों के इतनी गहन अनुभूतियों को सटीक शब्द देना सबके बस की बात नहीं है !
कविता के भाव बड़े ही प्रभाव पूर्ण ढंग से संप्रेषित हो रहे हैं !
आभार!
......दिल को छू लेने वाली प्रस्तुती

संगीता स्वरुप ( गीत ) ने कहा…

सब कुछ ख़ामोशी मे दबकर तो रह गया
मगर चंद सवाल है ,जो चीखते रह गये ।

दर्द की चीत्कार सी लगी यह रचना ..

प्रवीण पाण्डेय ने कहा…

वेदना भरी रचना।

kshama ने कहा…

Wah! Bahut khoob!Waaqayi kuchh sawaal cheekhte rah jate hain!

Arvind Mishra ने कहा…

कुछ अहसासों की सहज अभिव्यक्ति

Rajesh Kumar 'Nachiketa' ने कहा…

विचारों और भावनाओं के बहुत बढ़िया अभिव्यक्ति..
प्रणाम.

Kunwar Kusumesh ने कहा…

सब कुछ ख़ामोशी मे दबकर तो रह गया
मगर चंद सवाल है ,जो चीखते रह गये

दर्द और कसक का अहसास कराती सुन्दर रचना.

Indranil Bhattacharjee ........."सैल" ने कहा…

सब कुछ ख़ामोशी मे दबकर तो रह गया
मगर चंद सवाल है ,जो चीखते रह गये ।

बहुत सुन्दर !

Sunil Kumar ने कहा…

सब कुछ ख़ामोशी मे दबकर तो रह गया
मगर चंद सवाल है ,जो चीखते रह गये
क्या बात है वह ख़ामोशी भी कैसी है जिसमें सवालों की चीख भी सुनाई नही दी बहुत अच्छी रचना , बधाई

रचना दीक्षित ने कहा…

बहुत पीड़ा है अंतर्मन की इस कविता में पर कई बार सोचती हूँ की अगर ये कुछ प्रश्न चीख चीख कर न बुलाएँ तो कुछ बाते जरुरी होते हुए भी दिमाग से निकल जाती हैं

दिगम्बर नासवा ने कहा…

सब कुछ ख़ामोशी मे दबकर तो रह गया
मगर चंद सवाल है ,जो चीखते रह गये ....

इन सवालों की खोज ही तो जीवन है ....
प्रेम हो तो ये सवाल नहीं आते ....

वन्दना अवस्थी दुबे ने कहा…

सब कुछ ख़ामोशी मे दबकर तो रह गया
मगर चंद सवाल है ,जो चीखते रह गये ।
बहुत सुन्दर है ज्योति.

Dr Varsha Singh ने कहा…

....मार्मिक, हृदयस्पर्शी पंक्तियां हैं।
बधाई स्वीकारें।

Vijay Kumar Sappatti ने कहा…

jyoti ji

deri se aane ke liye maafi , bahut dino baad aaya hoon .

itni acchi rachna hai , man ki udaasi ko aur gahra kar gayi hai ..

Badhayi

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मेरी नयी कविता " तेरा नाम " पर आप का स्वागत है .आपसे निवेदन है की इस अवश्य पढ़िए और अपने कमेन्ट से इसे अनुग्रहित करे.
"""" इस कविता का लिंक है ::::

http://poemsofvijay.blogspot.com/2011/02/blog-post.html

विजय

रजनीश तिवारी ने कहा…

बहुत अच्छी लगी आपकी रचना । कभी कुछ कहते नहीं बनता, कभी कुछ करते नहीं बनता , कभी चलते नहीं बनता , कभी रुकते नहीं बनता !
शुभकामनाएँ !

Rakesh Kumar ने कहा…

Ajit Gupta ji ki post per aapki tippani dekh aapki post per aana hua.Aapki post bhavanao ki sunder abhivyakti hai."Rahiman dhaga prem ka mat dijo chatkaay,toote se bhi na jude, jude ghaanth pad jaaye" aapka yeh likhna 'koshish to ki mitaane ki,magar daag phir bhi reh gaye' shaayad isi aur ingit karta hai.
Mere blog 'Mansa vacha karmana' per aapka swaagat hai.

डॉ॰ मोनिका शर्मा ने कहा…

सब कुछ ख़ामोशी मे दबकर तो रह गया
मगर चंद सवाल है ,जो चीखते रह गये ।

मन की वेदना को सुंदर शाब्दिक अर्थ दिए हैं आपने ...बेमिसाल हैं सारी पंक्तियाँ

VIJUY RONJAN ने कहा…

हर उदासी मे बढ़कर तुम्हे गले लगाना चाहा
कुछ चुभने लगा तभी ,और कदम ठहर गये ।

बहुत अच्छी रचना.

ज्ञानचंद मर्मज्ञ ने कहा…

सब खामोशी में दब कर रह गया
मगर चंद सवाल हैं जो चीखते रह गए

सब कुछ स्वयं जिया हुआ सा लग रहा है !
आपने जिस खूबसूरती से हर पंक्तियों में संवेदना की अंतिम गहराई को स्थापित किया है वह काबिले तारीफ है !
आभार !

हरकीरत ' हीर' ने कहा…

):):
फिर वही बेलफ्ज़ हैं मेरे सवाल ..
के तू है भी मेरा और मैं तेरी नहीं .....

ज्योति सिंह ने कहा…

aap sabhi mitro ko dhanyawaad ,dil se aabhari hoon sabki .

Parashuram Rai ने कहा…

चन्द सवालों में उलझी जिन्दगी का बहुत मार्मिक और सुन्दर चित्रण आपकी रचना में मिला। आभार।

सतीश सक्सेना ने कहा…

वेदना को व्यक्त करना आसान नहीं होता ...
शुभकामनायें आपको !

'साहिल' ने कहा…

आपकी सभी रचनाएं अच्छी लगी.....

VIJAY KUMAR VERMA ने कहा…

सब खामोशी में दब कर रह गया
मगर चंद सवाल हैं जो चीखते रह गए
बहुत अच्छी रचना

डॉ. नूतन डिमरी गैरोला- नीति ने कहा…

bahut sundar rachnaa ..bhaavon se ot prot... dard me doobi..
aapki prastuti kal charchamanch me hogi... aap bhi vahan aayen aur apne vichaar rakhen...
http://charchamanch.blogspot.com

Sadhana Vaid ने कहा…

बहुत ही खूबसूरत रचना है ज्योति जी !
सब कुछ खामोशी में दब कर तो रह गया,
मगर चंद सवाल हैं जो चीखते रह गये !

बहुत ही सुन्दर भावाभिव्यक्ति है ! आज पहली बार आपके ब्लॉग पर आई हूँ ! अफ़सोस हो रहा है इतनी देर से क्यों आई ! बहुत सुन्दर रचना है ! बधाई !

वन्दना ने कहा…

सब कुछ ख़ामोशी मे दबकर तो रह गया
मगर चंद सवाल है ,जो चीखते रह गये ।

और उस चीख को आज तक मुकाम नही मिला………………
क्या सुनाई देती है तुम्हें …………एक बेहतरीन शब्द रचना के लिये हार्दिक बधाई।

संगीता स्वरुप ( गीत ) ने कहा…

हम जानते है ये खूब ,दगा फितरत मे नही तुम्हारे
कोशिश तो की मिटाने की ,मगर दाग फिर भी रह गये ।


बहुत खूब ...सुन्दर प्रस्तुति

Rakesh Kumar ने कहा…

ज्योति जी ,
मेरे ब्लॉग 'मनसा वाचा कर्मणा' की नई पोस्ट "मो को कहाँ ढूंढता रे बंदे" पर आपके
बहुमूल्य वैचारिक दान की अपेक्षा है .

JHAROKHA ने कहा…

jyoti ji aap mere blog par aaye bahut hi achha laga.
bahut hi umda rachna jo bahut kuchh
kahti hui dil me utar gai.
badhai------
poonam

Patali-The-Village ने कहा…

आपकी सभी रचनाएं अच्छी लगी| धन्यवाद|

Minakshi Pant ने कहा…

वो रोये तो मुहं मोड़ कर रोये

कोई मज़बूरी होगी जो दिल खोलकर रोये

मेरे सामने टुकड़े कर दिए मेरी तस्वीर के

बाद में पता चला के उन्हें जोड़ के रोये |

दर्द को दर्शाती रचना |