सोमवार, 3 अगस्त 2009

बेलगाम ख्यालो के संग

हर क्षण , हर पल

फैसले यहाँ बदलते है

ज़िन्दगी जीने की चाह भी

कितने रंग में ढलती है

अस्थाई ख्वाहिशों के महल

निराधार ही होते है

बेलगाम ख्यालो के संग

फिर भी

हवाओ में सफर तय

करते है

7 टिप्‍पणियां:

अर्कजेश *Arkjesh* ने कहा…

सही कहा आपने, जिन्दगी एक निरन्तर बदलाहट है, बार बार बिखरने और जुडने की कवायद है ।

दिगम्बर नासवा ने कहा…

इसी का नाम तो ज़िन्दगी है.............. बदलती रहती है हर पल........... सब कुछ अस्थाई है............ sundar rachna है आपकी

Mumukshh Ki Rachanain ने कहा…

सत्य ही कहा आपने.
फिर भी आज का इन्सान अपने विचारों को "चिरस्थायी" डंके की चोट पर कहने से नहीं चूकता, भले ही उसके चीथड़े कुछ ही दिनों में हवाओं के साथ उड़ने लगे.

सुन्दर, गहन विचारों की प्रस्तुति.
हार्दिक बधाई.

Kishore Choudhary ने कहा…

बहुत सुंदर लिखा है पसंद आया, आपके यहाँ हर बार कुछ नया ही मिलता है देखने को.

ज्योति सिंह ने कहा…

इस बार की टिप्पणियो से मन गदगद हो गया इतने सुन्दर विचारो को पढ़कर बेहद प्रसन्नता हुई .आप सभीलोगो का बहुत बहुत शुक्रिया ,चार ही चालीस का भार उठाये हुए है .

'अदा' ने कहा…

अस्थाई ख्वाहिशों के महल
निराधार ही होते है ।
बेलगाम ख्यालो के संग
फिर भी
हवाओ में सफर तय
करते है ।
बहुत ही सटीक और वाजिब ख्याल

और अब मेरी बात ..

हर दिन एक ख़्वाब
मेरी आँखों में
उठ खड़ा होता है
जिसे मैं बड़ी बेरहमी से
हकीक़त की दीवार में
चुन देती हूँ !

ज्योति सिंह ने कहा…

ada ji aapki baat to mere man ko chhu gayi ,ye bhi kuchh kam shaandaar nahi .hum pahale hi is ada ke kayal ho baithe hai .bahut khoob aage bhi intjar ...