मंगलवार, 18 अगस्त 2009

द्वेष

बाढ़ की चपेट में

सारा गाँव ,

आतंक कुछ क्षेत्र का

आतंकित सारा समाज ,

आतंकवादी कुछ एक

शिकार सम्पूर्ण देश

चलो ढूंढें ऐसी जगह

हो ,जहाँ सांप्रदायिक दंगे

हो , कोई क्लेश

टूट गया इंसानियत का ढांचा

वज़ह रही एक द्वेष ।

7 टिप्‍पणियां:

योगेश स्वप्न ने कहा…

umda rachna. aap dhoondh len to mujhe bhi batayen.

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक ने कहा…

"चलो ढूंढें ऐसी जगह
न हो ,जहाँ सांप्रदायिक दंगे
न हो , कोई क्लेश।"

बेहतरीन भावों से सजी-सँवरी रचना।
बधाई।

ज्योति सिंह ने कहा…

yogesh ji ,shashtri ji shukriya .yogesh ji mile to sahi .phir .....

Babli ने कहा…

वाह बहुत बढ़िया लगा! आपकी हर एक रचनाएँ मुझे बेहद पसंद है!

ज्योति सिंह ने कहा…

babli ji shukriya taarif ke liye .

दिगम्बर नासवा ने कहा…

ऐसा जहां तो मिल कर बनाना पड़ेगा ............. जो हम सब कर सकते हैं ........... सुन्दर भाव हैं आपकी रचन में ......

vallabh ने कहा…

चलो ढूंढें ऐसी जगह
न हो ,जहाँ सांप्रदायिक दंगे
न हो , कोई क्लेश ।

यह खोज मुश्किल है लेकिन असंभव नहीं.....