शनिवार, 31 अक्तूबर 2009

इंदिरा जी .....

एक रौशनी मिलती थी हिंद को

वह रौशनी कहाँ विलीन हुई ,

एक किरण जो वर्षो से

पथ हमको रही दिखलाती ,

वह पथ तो है सामने अब भी

पर किरण कहाँ विलीन हुई ,

रही हिंद की तुम बन 'माँ '

हिंसा की थी शत्रु महां ,

अब भी हिंद तुमको रहा बुला

क्यो हो गई तुम हमसे जुदा ।

जिनके वियोग से हो व्याकुल

सारी जनता हुई दीन ,

उनको खोकर पाने की

हुई चाह सबकी असीम ,

इस जग को करके रौशन

और हो गई तुम यही अमर ,

देश को चलाने वाली 'ज्योति '

जाने कहाँ अवलीन हुई ।



...........?????????????????

जय हिंद

इंदिरा गाँधी के पुण्य तिथि पर इन कुछ शब्दों द्वारा मैं उन्हें श्रधांजली भेट कर कर रही हूँ ,यह रचना उस वक्त की लिखी हुई है जब उनकी दर्दनाक मौत हुई ,वो मंज़र आज भी ताज़ा है ,पूरा देश ही नही ये सारा जहां आसुओं में डूबा रहा और चारो तरफ़ गहरा सन्नाटा ,ज़मीन आसमान भी गले मिल कर उस दिव्य आत्मा के इस निर्मम हत्या पर शौक मना रहे थे और कितने लोग उनके जाने के सदमे को बर्दाश्त नही कर पाये बहुत बातें याद आ रही मगर यही रोकती हूँ ,नारी जाती की इस शक्ति को शत -शत नमन ,'दिखा गई पथ ,सीखा गई जो हमको सीख सिखानी थी .'

10 टिप्‍पणियां:

Pandit Kishore Ji ने कहा…

sachmuch badiya likha hain aapne
jyotishkishore.blogspot.com

दिगम्बर नासवा ने कहा…

INDRA JI KO YAAD KARTE HUVE ... BHAAV BHEENI SHRADHAANJALI DI HAI AAPNE ...

योगेश स्वप्न ने कहा…

indira ji ke liye bahut sunder bhav bheeni shradhanjali hai.

jyoti ji ek baat kahun yadi bura na maane to , aapka photo bilkul indira ji se mel khata hai, poori jhalak dikhai deti hai.

ज्योति सिंह ने कहा…

किशोर जी ,दिगम्बर जी एवं स्वप्न जी बहुत -बहुत धन्यवाद ,स्वप्न जी आपका मन बहुत कोमल और निर्मल है पहली बात इसमें बुरा मानने जैसी कोई बात नहीं यह तो तारीफ़ है ,दूसरी बात यह सुच बचपन से सुनती आ रही हूँ ,बचपन में तो उनकी कॉपी लगती रही ,मैं इंदिरा जी आमने -सामने मिली हूँ और बाते भी की हूँ और हाथ से बने चीजे भी भेट की हूँ ,वो तस्वीर भी मेरे पास है . और इस बात की मुझे ख़ुशी है बेहद .आपको फिर से शुक्रिया .

रश्मि प्रभा... ने कहा…

पर उनके कार्य आज भी स्मरण योग्य हैं,और इस तरह वे हमारे बीच ही हैं

BrijmohanShrivastava ने कहा…

पथ तो सामने अब भी पर किरण कहां विलीन हुई । फ़्लो में पढ्ने मे मुझे इस लाइन मे दिक्कत हुई ""अब भी हिन्द तुमको बुला रहा "" उसको मैने इस तरह पढ लिया ""अब भी हिन्द बुलाता तुमको ""।आप भाग्यशाली है जो उनसे आमने सामने मिलीं ,उनसे बातें कीं ,अपनी बनाई चीजें उन्हे भेंट की

योगेश स्वप्न ने कहा…

jyoti ji , lage haath indira ji ke saath ki photo bhi dikha den, hum sabhi dekhna chahenge.

Apanatva ने कहा…

bahut dil se likhee bhavpurn sraddhanjaleedetee kavita .badhai

ज्योति सिंह ने कहा…

shukriya meri bhavnao ko samjhne aur uska saath dene ke liye .aap sabhi ki aabhaari hoon .

VIJAY TIWARI " KISLAY " ने कहा…

ज्योति जी
अभिवंदन
निश्चित रूप से जब भी नारी शक्ति, बहादुर,
राजनैतिक, प्रशासक और निर्भीक महिला की बात आएगी
तो प्रियदर्शिनी श्रीमती इंदिरा गांधी का नाम प्रमुखता से
लिया जाएगा.
- विजय