शुक्रवार, 1 मई 2009

यकीं बन कर आए,

चाहो तो रोक लो,

वरना क्या जाने कब,

धुँआ बन उड़ जाए।

इस एतबार का

कुछ कहा न जाए,

कुछ पल पहले साथ,

आगे धोखा दे जाए।

4 टिप्‍पणियां:

SWAPN ने कहा…

chhoti si rachna , khubsurat. badhai.

ज्योति सिंह ने कहा…

shukariya .yakin to apne aap me khubsurat hai.

shiv sagar ने कहा…

Hi, it is nice. Your views are clear in the darkness. Keep it on.

ज्योति सिंह ने कहा…

dhanyabad.achha laga .