बुधवार, 6 मई 2009

'गुरुदेव '

"शान्ति निकेतन "के कर्णधार
संघर्ष भरा जीवन ,फिर भी
शांत उदार दया भाव से
परिपूर्ण है तुम्हारा आधार
संगीत की धरोहर ,
साहित्य की खान ,
ऐसे सर्वोच्च अदभुत संगम पर
सदा है ,भारत को अभिमान
'गुरुदेव' से सुशोभित उपनाम
सुयश तुम्हारा विश्व विख्यात
बढ़ा तुम्हारे ही राष्ट्रगान से
भारतीये तिरंगे का सम्मान
जन-गण-मन के सूत्रों में बंधा ,
मातृभूमि के हर क्षेत्र का मान
बंग-भूमि के दिव्य पुरूष तुम
स्वीकारो जन-जन का प्रणाम

4 टिप्‍पणियां:

SWAPN ने कहा…

gurudev ko mera bhi naman,gurudev ka smaran karane ke liye jyoti ji aapko dhanyawaad. kavita achchi lagi.

वन्दना अवस्थी दुबे ने कहा…

गुरुदेव को शत-शत नमन... उनके जन्मदिवस पर अच्छी आदरान्जलि. बधाई.

ज्योति सिंह ने कहा…

aap sabhi logo ko dhanyawaad .mein ye hamesha chahungi ki apne guru jano ka samman aur dhyan barabar banaye rakkhe .unke gyan ke dwara hi hamara jeevan roasan hota hai .unke saalgirah pe unhe mera shat-shat naman .

संजय भास्कर ने कहा…

बहुत ही सुन्‍दर प्रस्‍तुति ।