हाँ ,ऐसा होता है जीवन में कभी कभी जब संशय की स्थिति आती है... उद्देश्य से भटक न जाएँ बस ...राहें चाहे बदलनी पड़ें. चंद पंक्तियों में अच्छी भावाभिव्यक्ति की है.
ज्योति जी, एक बार फिर कविता में भाव स्पष्ट नहीं हो सके. अनजान से रास्ते , पहचान लिए साथ में , इन पंक्तियों को तो बिल्कुल ही नहीं समझ पा रहा. हो सकता है, मेरा कविता-ज्ञान ही कम हो.
टिप्पणियाँ
उद्देश्य से भटक न जाएँ बस ...राहें चाहे बदलनी पड़ें.
चंद पंक्तियों में अच्छी भावाभिव्यक्ति की है.
अनजान से रास्ते ,
पहचान लिए
साथ में ,
इन पंक्तियों को तो बिल्कुल ही नहीं समझ पा रहा. हो सकता है, मेरा कविता-ज्ञान ही कम हो.
प्रेरणादायी रचना ।
अति प्रशंसनीय ।