शक के दायरे में
हर बात पे लोग टांग अडाने लगे है , पत्थर मार कर घर में झांकने ल गे है , कानों को चिपका कर सुनने लगे है , फिर भी तसल्ली न वे पा सके हैं , तो शगूफे वो अपने उडाने लगे है , और म न गढ़त किस्से बनाने लगे है , हर बात उनकी समझ से परे है , फिर भी कोशिशों में बराबर लगे है