जब कभी समाचार देखती हूं, या खाली बैठती हूं, देश की स्थिति का मुआयना करने लगती हूं, और सोचती हूं, कुछ लिखूं। अपने रंगीले हिन्दुस्तान पर पर जब लिखने बैठती हूं शब्द तब मौन हो जाते हैं, सारे और तस्वीर सभी एक एक कर सामने आकर बोलने लगतीं है अपनी हालत दर्शाने लगती हैं- और कहती है- क्या लिखोगे? इतनी शब्द और शक्ति है, तुम्हारी इस कलम के पास? जो कैद कर दे सब, तुम्हारे कुछ पलों में। नही कर पाओगे अगर आवाज़ उठाओगे तो हार जाओगे या बिक जाओगे। ये कलम आध में ही दम तोड़ देगी, मंजिल तक ले जाना मुमकिन नहीं। इसलिये खयाल छोड़ो क्रांतिकारी विचार तोड़ो बड़ी खुशी से पन्द्रह अगस्त पर झंडे को सलाम ठोंको सच्चे और देश प्रेमी होने का फ़र्ज़ अदा करो। जय हिन्द .