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बूंद-- बूंद

जिंदगी इतनी आसानी से देती कहाँ हमे कुछ , संघर्षों के बिना है होता हासिल कहाँ हमे कुछ । --------------- गम अज़ीज़ हो गया खुशी को नकार के , उठा कर हार गये हम जब नखरे  बहार के  । *****************

मन

अथाह सागर में उफनता अशांत लहरों सा ये मन मेरा । जीवन की इन उलझनों को सुलझाता हुआ ये मन मेरा । इस उधेड़ - बुन के जाल में फंस कर रह गया ये मन मेरा । ------------------------------------- नींव की पुनरावृति कर खंडहर क्यो बुलंद करते हो ? जर्जर हो गये जो ख्याल उनमे हौसला कहाँ जड़ पाओगे । अतीत को वर्तमान सा न बनाओ टूटे मन को कहाँ जोड़ पाओगे ।