'राजीव के स्मृति में '
आज फिर पलके भीग आई , आज फिर खोई पुरवा लौट आई , कुछ वर्षो पूर्व जो , खो गया अतीत में आज इतिहास बनकर लहराई , वह खौफनाक हादसा जो , तुम्हे हमसे जुदा कर गई , यही हादसा याद बनकर आंखों में फिर उतर गई , उम्मीद हमें अभी भी है तुम्हारी वापसी की , तुम आओगे उजाला बनकर शीतल चांदनी का , राष्ट्र का कण -कण है , अभी भी तुम्हे पुकारता तुम्हारी याद में हर वर्ष , है ये आंसू बहाता , इस राष्ट्र को तुम्हारा ही कर्णधार चाहिए , उद्धार हो इस देश का ऐसा दिव्य पुरूष चाहिए