अहसास.........
धीरे-धीरे यह अहसास हो रहा है, वो मुझसे अब कहीं दूर हो रहा है। कल तक था जो मुझे सबसे अज़ीज़, आज क्यों मेरा रकीब हो रहा है। ************************* इन्तहां हो रही है खामोशी की, वफाओं पे शक होने लगा अब कहीं। **************************** जिंदगी है दोस्त हमारी, कभी इससे दुश्मनी, कभी है इससे यारी। रूठने -मनाने के सिलसिले में, हो गई कहीं और प्यारी । **************************** इस इज़हार में इकरार नज़रंदाज़ सा है कहीं, थामते रह गए ज़रूरत को, चाहत का नामोनिशान नहीं.