उम्मीद लिंक पाएं Facebook X Pinterest ईमेल दूसरे ऐप अप्रैल 23, 2009 समझौता भी आता है, सम्हलना भी आता है। ज़िन्दगी को जीने का हल निकल आता है। ******************** गम को खुशहाल बना रही हूँ, जख्मों को भरती जा रही हूँ। चंद ख्वाहिशे अब भी है मेरे साथ , उनके लिए रास्ते तलाश रही हूँ. और पढ़ें