संदेश

याद-ए-तन्हाई

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दराजे -तन्हाई , दार-मदार हो जिसके अश्को ने सदा साथ निभाया । करवटे दर- गुज़र करती रही आँखों में भरे नींदों को , तन्हाई का ऐसा आलम कब रात गई कब सहर हुई । दर्द भी हल दर्क* न सका , और जागते को सुबह भी जगाने आई । (दर्क=पाना।)

चंद सवाल है जो चीखते ......

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तेरे मेरे दरम्यान सभी रास्ते यकायक बंद हो गये क्या कहे ,न कहे हम इस सवाल पर ठहर गये । हम जानते है ये खूब ,दगा फितरत मे नही तुम्हारे कोशिश तो की मिटाने की ,मगर दाग फिर भी रह गये । हर उदासी मे बढ़कर तुम्हे गले लगाना चाहा कुछ चुभने लगा तभी ,और कदम ठहर गये । सब कुछ ख़ामोशी मे दबकर तो रह गया मगर चंद सवाल है ,जो चीखते रह गये । हर बात गहरे यकीन का अहसास दिलाती है पर वो नही कभी कर पाये जो तुम कह गये ।

मां शारदे

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संगीत की देवी वीणावादिनी जय मां शारदे, विद्यादायिनी. तेरा वैभव असीम अपार पूजे तुमको विश्व-संसार. अद्वितीय प्रभा की प्रतिमा तुझमें, मुख ज्योति से प्रस्फुटित होती किरणें, उन किरणों से हर लेती तू जग की सारी यामिनी, वीणावादिनी. दुनिया के क्लेषों से रहती है दूर सदा अपने भक्तों को संवारती वरदानों से सदा तेरी करुणा के सागर में, दया का भाव बंधा सुन ले विनती हे मां, लक्ष्यों को मेरे जीवन से बांध. कमल की सेज पर सुशोभित जय हो तेरी हंसवाहिनी पुस्तक-धारिणी दया-दायिनी.

बदलते रंग

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रुख हवाओ का बदला तो सब कुछ बदल गया , दिशा बदल गयी रास्ते बदल गये , ख्वाहिशो के रंग उतरकर नये रंगों में ढल गये , सूरते भी आईने में बदलती नज़र आई , रिश्तो के मायने नई भूमिका सजाई , मोटे - मोटे अक्षरों को हमने रेखांकित किया , और हर शब्द को व्याख्यायित किया ।

आशाओ के दीप जलाये

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हर बार ये कहते आये है हर बार ये सुनते आये है , इस तिरंगे के नीचे हमने बहुत से प्रण उठाये है । पर इस पर्व के जाते ही हम सब बिसर जाते है , सिर्फ कोरे वादे करके ही सच्चे देशभक्त बन जाते है । अपने वीरो जैसा जुनून हम क्यों नही पैदा कर पाये , जो देकर आहुति प्राणों की इस देश की जान बचाये । धरती माँ के पोछे आंसू सीना छलनी होने से बचाये , बनके उनके सच्चे सपूत जीवन को सफल बनाये । हो हरियाली इस धरती पर आशाओ के दीप जलाये । जय हिंद । सभी बंधुओ को गण तंत्र दिवस की हार्दिक बधाई , सारे जहां से अच्छा हिन्दुस्तान हमारा । मजहब नही सिखाता आपस में बैर रखना , प्राण मित्रो भले ही गवाना , पर न झंडा ये नीचे झुकाना । वन्दे मातरम् वन्दे मातरम वन्दे मातरम् ।

आधुनिकता ........

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आधुनिक ता परिधानों में नही आधुनिकता दिखावे में नही , आधुनिकता झलकती है अपने विचारो से , आधुनिकता दिखती है अपने व्यवहारों में , आधुनिकता सुसंस्कार में आधुनिकता पावन प्यार में । अश्लीलता से सर झुकता है अभद्रता से रिश्ता टूटता है , रेशमी परदे से हालात ढकते नही कर्जो पर शान - शौकत टिकते नही , शालीनता में रहकर शिष्टता निभाये अपनी सुसंस्कृति को आगे बढ़ाये , धर्म के नाम पर झंडे न लगाये जाति - पाति पर सवाल न उठाये । जहाँ भूख बिलखती है दो रोटी के आस में , पेट को वो ढकती है अपने दोनों पाँव से , लाचार खड़ा होता है आदमी जहाँ इलाज में , घर छीन लिया जाता जहाँ वृद्धों के हाथ से , भेद भाव पनपते है यहाँ अमीरी - गरीबी से , इमानदारी खरीद ली जाती नोटों की गड्डी से । हालात जिस देश के हो इतने गरीब बेचकर इंसानियत और जमीर , हम कैसे कह सकते है कि हम है यहाँ आधुनिक ।

नए साल के आने पर ..

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ये साल गुजरा तो कितने बाते याद आई , क्या खोया क्या पाया सोच ये जहन में उभर आई । बही खाते अपने पन्ने धड़ा धड़ पलटने लगे , नफा - नुकसान का हिसाब फटाफट बताने लगे । वक़्त की रफ़्तार का तब गहरा अहसास हुआ , एक वर्ष गुजर गया इसका अंदाज हुआ । जिंदगी हम तुझसे और एक बर्ष दूर हो गये , सोचकर ये दिल और उदास हुआ । तभी इरादे को दृढ़ की अपनी सोच को नई दिशा दी , छूट गये जो काम गुजरे साल में करेंगे हम उन्हें पूरा इस नए साल मे । ................................................................... आप सभी मित्रो को नव बर्ष की ढेरो बधाइयां , नव बर्ष मंगलमय हो .