एक सा लिंक पाएं Facebook X Pinterest ईमेल दूसरे ऐप जनवरी 04, 2010 कल जिस तरह आरम्भ हुई थी ,आज तक वैसी ही बनी रही । प्रसून वेदना मानस पटल पर यू अटल छवि सी अंकित रही । वर्तमान - भविष्य के मध्य अतीत का आरम्भ भी वही और अंत भी वही । लिंक पाएं Facebook X Pinterest ईमेल दूसरे ऐप टिप्पणियाँ राज भाटिय़ा ने कहा… वर्तमान - भविष्य के मध्य अतीत काआरम्भ भी वही और अंत भी वही ।बहुत ही सुंदर भाव लिये.धन्यवाद Apanatva ने कहा… इस टिप्पणी को लेखक द्वारा हटा दिया गया है. Apanatva ने कहा… intzar us din ka jis din aapakee rachana vedana ke bhav se hee pare ho .nav varsh aapake vartmaan ko khushiyon se bhar de isee aasheesh ke sath मनोज कुमार ने कहा… बिलकुल सही कहा आपने। संजय भास्कर ने कहा… बिलकुल सही कहा आपने। Randhir Singh Suman ने कहा… वर्तमान - भविष्य के मध्य अतीत काआरम्भ भी वही और अंत भी वही ।nice शोभना चौरे ने कहा… poori kvita bahut hi sundar कमलेश वर्मा 'कमलेश'🌹 ने कहा… अच्छी लेखन शैली की प्रतीक हैं ... ज्योति सिंह ने कहा… ye purani rachna hai ,jo dalni thi uski taiyaari nahi rahi ,is karan ise dala ,magar aap sabhi ki tippani ne hausala badha diya ise pasand karke ,shukriyaan संजय भास्कर ने कहा… ARE MUMMY KAISI HAI...AAPKA BETA SANJAY BHASKAR संजय भास्कर ने कहा… कल जिस तरह आरम्भ हुई थी ,आज तक वैसी ही बनी रहीलाजवाब पंक्तियाँ अनामिका की सदायें ...... ने कहा… khoobsurat bhaav. दिगम्बर नासवा ने कहा… वर्तमान - भविष्य के मध्य अतीत काआरम्भ भी वही और अंत भी वही ...शून्य से निकल कर शून्य में ले जाती हुई शशक्त रचना ......... Yogesh Verma Swapn ने कहा… bahut sunder abhivyakti. रचना दीक्षित ने कहा… वर्तमान - भविष्य के मध्य अतीत काआरम्भ भी वही और अंत भी वही ...आपका वर्तमान भविष्य और अतीत. मेरी भी एक वर्तमान भविष्य और अतीत पर कविता तैयार है .कब पोस्ट कर पाती हूँ पता नहीं kshama ने कहा… Behad sundar abhiwyakti...! Kaash mai bhi aisa likh pati! हरकीरत ' हीर' ने कहा… कल जैसा था भले ही आज वैसा हो पर भविष्य वैसा नहीं होगा उम्मीद है ......!! मनोज भारती ने कहा… हरकीरत जी से सहमत हूँ । Alpana Verma ने कहा… वर्तमान - भविष्य के मध्य अतीत काआरम्भ भी वही और अंत भी वही ।बहुत ही सुंदर बात कह दी आप ने...पुरानी कविता में भी लेखन कहीं कच्चा नहीं दिखता.बहुत गहन भाव इन पंक्तियों में.आभार.
टिप्पणियाँ
आरम्भ भी वही और अंत भी वही ।
बहुत ही सुंदर भाव लिये.
धन्यवाद
nav varsh aapake vartmaan ko khushiyon se bhar de isee aasheesh ke sath
आरम्भ भी वही और अंत भी वही ।nice
AAPKA BETA
SANJAY BHASKAR
आज तक वैसी ही बनी रही
लाजवाब पंक्तियाँ
आरम्भ भी वही और अंत भी वही ...
शून्य से निकल कर शून्य में ले जाती हुई शशक्त रचना .........
आरम्भ भी वही और अंत भी वही ...
आपका वर्तमान भविष्य और अतीत. मेरी भी एक वर्तमान भविष्य और अतीत पर कविता तैयार है .कब पोस्ट कर पाती हूँ पता नहीं
आरम्भ भी वही और अंत भी वही ।
बहुत ही सुंदर बात कह दी आप ने...
पुरानी कविता में भी लेखन कहीं कच्चा नहीं दिखता.
बहुत गहन भाव इन पंक्तियों में.
आभार.