गुरुवार, 23 अप्रैल 2009

उम्मीद

समझौता भी आता है,

सम्हलना भी आता है।

ज़िन्दगी को जीने का

हल निकल आता है।

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गम को खुशहाल बना रही हूँ,

जख्मों को भरती जा रही हूँ।

चंद ख्वाहिशे अब भी है मेरे साथ ,

उनके लिए रास्ते तलाश रही हूँ.

14 टिप्‍पणियां:

वन्दना अवस्थी दुबे ने कहा…

बहुत सुन्दर रचनायें....लिखती रहें...बधाई.

Harshvardhan ने कहा…

behatareen rachna........

डॉ.भूपेन्द्र कुमार सिंह ने कहा…

good thinking and good word selection,congrats.keep it up ,you will make your presence felt.
Dr.Bhoopendra

Yogesh Verma Swapn ने कहा…

sunder rachnayen. blog jagat men swagat hai.

शशांक शुक्ला ने कहा…

आपकी रचना बहुत खूबसूरत है...

Ashok Kumar pandey ने कहा…

सुंदर भावनाएँ ... बधाई

Dr. Ashok Kumar Mishra ने कहा…

achchi kavita-

http://www.ashokvichar.blogspot.com

नवनीत नीरव ने कहा…

samadhan agar mil jaaye to raste khud ba khud hi nikal aate hai.
Nanvit Nirav

श्यामल सुमन ने कहा…

बहुत खूब। कहते हैं कि-

ख्वाहिशों को खूबसूरत शक्ल देने के लिए।
ख्वाहिशों की कैद से आजाद होना चाहिए।

सादर
श्यामल सुमन
09955373288
www.manoramsuman.blogspot.com
shyamalsuman@gmail.com

गोविंद गोयल, श्रीगंगानगर ने कहा…

nice, naraya narayan

दिगम्बर नासवा ने कहा…

आशा से भरी हुयी सुन्दर रचना..........
स्वागत है आपका ब्लॉग जगत में

ज्योति सिंह ने कहा…

आप सब मेरे ब्लौग पर आये,मेरा उत्साहवर्धन किया, इसके लिये बहुत-बहुत धन्यवाद.

बेनामी ने कहा…

सुन्दर रचना

संगीता पुरी ने कहा…

बहुत सुंदर…..आपके इस सुंदर से चिटठे के साथ आपका ब्‍लाग जगत में स्‍वागत है…..आशा है , आप अपनी प्रतिभा से हिन्‍दी चिटठा जगत को समृद्ध करने और हिन्‍दी पाठको को ज्ञान बांटने के साथ साथ खुद भी सफलता प्राप्‍त करेंगे …..हमारी शुभकामनाएं आपके साथ हैं।