गुरुवार, 1 मार्च 2012

जमीर


उसका जमीर
आज भी
जिन्दा है ,
तभी तो खड़ा हो
आइने के आगे
वह शर्मिंदा है .

27 टिप्‍पणियां:

धीरेन्द्र सिंह भदौरिया ने कहा…
इस टिप्पणी को लेखक द्वारा हटा दिया गया है.
kshama ने कहा…

Wah! Kya baat hai!

इस्मत ज़ैदी ने कहा…

wah !
bahut khoob!!

डॉ. मोनिका शर्मा ने कहा…

अद्भुत ....

Rakesh Kumar ने कहा…

'मुखडा क्या देखे दर्पण में,तेरे दया धर्म नहीं मन में'

कहते हैं आईने में मुखडा अपनी खूबसूरती
का आकलन करने के लिए देखते हैं.

लेकिन यदि आईना देख शर्मिंदगी महसूस हो,
और दया धर्म की ओर चलने की भी सोचे
तो सच में कहेंगें जमीर जिन्दा है.

आजकल आप बहुत गूढ़ होती जा रही हैं,ज्योति जी.आपके १६ शब्दों पर जितना लिखा जाए उतना ही कम है.शब्दों की ज्योति प्रज्जवलित करती हैं आप.आभार.

बेनामी ने कहा…

ummdaa lines

Jeevan Pushp ने कहा…

सार्थक प्रस्तुति !

दिगम्बर नासवा ने कहा…

Sach kaha hai ... Janvar aur insan mein Ab ye fark hai .. Insan sharm kho chuka hai ...

वन्दना अवस्थी दुबे ने कहा…

बहुत सुन्दर!! लाजवाब टाइप :)

यशवन्त माथुर (Yashwant Raj Bali Mathur) ने कहा…

कल 03/03/2012 को आपकी यह पोस्ट नयी पुरानी हलचल पर लिंक की जा रही हैं.आपके सुझावों का स्वागत है .
धन्यवाद!

प्रवीण पाण्डेय ने कहा…

सच है, दर्पण कुछ तड़प भर कर जाता है, हर बार..

Bharat Bhushan ने कहा…

आइने की जादूगरी ही है कि ज़मीर मरता नहीं प्रतिबिंबित होता रहता है.

Saras ने कहा…

बहुत प्यारी ..प्रभावपूर्ण लगी आपकी क्षणिका! बधाई !! पहली बार आपके ब्लॉग पर जाना हुआ

shalini rastogi ने कहा…

एक प्रभावशाली क्षणिका !!

संगीता स्वरुप ( गीत ) ने कहा…

बहुत खूब ....

प्रेम सरोवर ने कहा…

बहुत ही सारगर्भित प्रस्तुचि । मेरे नए पोस्ट "राम दरश मिश्र" पर आपकी प्रतिक्रिया के लिए इंतजार करूंगा । धन्यवाद ।

Anupama Tripathi ने कहा…

sarthak ...satya kathan ...
bahut sunder ...

Patali-The-Village ने कहा…

बहुत अच्छी प्रस्तुति| होली की आपको हार्दिक शुभकामनाएँ|

Rakesh Kumar ने कहा…

होली के रंगारंग शुभोत्सव पर बहुत बहुत
हार्दिक शुभकामनाएँ आपको.

Rajendra Swarnkar : राजेन्द्र स्वर्णकार ने कहा…

.
बहुत जानदार रचना है यह तो …
बधाई !

Rajendra Swarnkar : राजेन्द्र स्वर्णकार ने कहा…

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♥ होली ऐसी खेलिए, प्रेम पाए विस्तार ! ♥
♥ मरुथल मन में बह उठे… मृदु शीतल जल-धार !! ♥



आपको सपरिवार
होली की हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं !
- राजेन्द्र स्वर्णकार
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Kunwar Kusumesh ने कहा…

Happy Holi.

Asha Joglekar ने कहा…

आपकी कई छोटी छोटी किंतु बडे आशय वाली कविताएं पढ गई । बहुत ही अच्छा लगा । जमीर ऐसा ही होता है सही वक्त पर आपको सही गलत की पहचान कराता है ।

रश्मि प्रभा... ने कहा…

waah

Alpana Verma ने कहा…

bahut khuub likha hai Jyoti aap ne..

धीरेन्द्र सिंह भदौरिया ने कहा…

वाह ! ! ! ! ! बहुत खूब सुंदर रचना,बेहतरीन भाव प्रस्तुति,....

MY RECENT POST...काव्यान्जलि ...: तुम्हारा चेहरा,
MY RECENT POST ...फुहार....: बस! काम इतना करें....

Akhilesh pal blog ने कहा…

sundar prastuti jyoti ji hapay new year