रविवार, 21 फ़रवरी 2021

जिंदगी से सब.....

मुक्कमल जहां किसी को 
 मिलता नही
न मिले न सही 
कोई बात नही , 
दुनिया को समझने के लिए
जानने के लिए
जिंदगी ही काफी है 
यहाँ जिंदगी ही बहुत कुछ
दे देती है हमें 
ये भी कम नहीं , 
ये जिंदगी ही
सही सलामत रहे
बहुत है कही  । 

****************
ये जिंदगी यू ही कुछ नहीं देती 
बहुत कुछ देती है तो बहुत कुछ ले भी है लेती 
यहाँ जिंदगी से बढ़ कर जिंदगी से पहले कुछ नहीं 
इसी की वजह से सारी जरूरतें सारी बातें है होती, 
ये सही सलामत है तब तक सब कुछ साथ है । 
जिस दिन ये नही उस दिन फिर कुछ नहीं , 
वजह भी यही, बेवजह भी यही हैं, इसलिए जो है जितना है उसे ही संभाल कर रक्खा जाये ,उसी के लिए दुआ किया जाये, सुख दुख सारे इसी के साथ है,जो कुछ अच्छा होता है मिलता है ,उसके लिए अपने मालिक का शुक्रिया अदा करे, जाने के बाद भी जो साथ रहता है वो है काम, एहसास ,कर्म, प्यार। इन्ही की कद्र करनी चाहिए, इन्ही की हिफाजत करनी चाहिए ,हम सभी  इंसान को , यहाँ हौसले से काम बनते हैं, हथियार से नही, यहाँ हौसला जीतता है ,हथियार नही । 
यू तो कोई गिला नहीं 
सबकुछ था क्या न था 
फिर भी एक कमी सी थी 
जिसका पता न था, 
जाने क्या बात हुई 
जाने क्या बात हुई? 


9 टिप्‍पणियां:

संगीता स्वरुप ( गीत ) ने कहा…

ज़िन्दगी सतत बहता दरिया है । बस बहते जाना है ।
मन के भावों को समेटे भावपूर्ण विचार ।।

yashoda Agrawal ने कहा…

आपकी लिखी रचना "सांध्य दैनिक मुखरित मौन में" आज सोमवार 22 फरवरी 2021 को साझा की गई है.........  "सांध्य दैनिक मुखरित मौन में" पर आप भी आइएगा....धन्यवाद!

Kamini Sinha ने कहा…

सादर नमस्कार ,

आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा कल मंगलवार (23-2-21) को 'धारयति इति धर्मः'- (चर्चा अंक- 3986) पर भी होगी।
आप भी सादर आमंत्रित है।
--
कामिनी सिन्हा

Onkar ने कहा…

सुन्दर प्रस्तुति.

जितेन्द्र माथुर ने कहा…

सरल शब्दों में गहरी बात ।

Dr Varsha Singh ने कहा…

सुंदर रचनात्मक अभिव्यक्ति...

आलोक सिन्हा ने कहा…

बहुत सुन्दर

मन की वीणा ने कहा…

बहुत सुंदर सटीक चिंतन।
जो मिला है उसी को संभाल ले बन्दे।
सारे सितारे थामने जितना आकाश भी तो चाहिए।
गजब।
बधाई ज्योति जी।

सधु चन्द्र ने कहा…

क्या बात!
सुन्दर रचना।
सादर।