आज के दिन ही हम एक हुए थे....कितना लम्बा सफ़र तय कर लिया, याद ही नहीं। लगता है कल की ही तो बात थी........ अहसास कभी उम्र नहीं पाते , कितनी सच्ची बात है ये। जीवन की ऊंची-नीची डगर पर चलते हुए कब एक अजनबी इतना अपना हो जाता है पता ही नहीं चलता.... ..... सुख-दुख के साझेदार हुए, जीवनभर के साथ हुए। कानों में संगम के गीत प्रिये, तुम तो मेरे मीत प्रिये। आंसुओं से भीगे हुए, पलकों पर कुछ अद्भुत सपने, हमने जो आँखों में समां लिए, तुम तो मेरे मीत प्रिये। उजियाले का अधिकार लिए, मिटा तम के आकर्षण प्रिये। ढलते सूरज को दे आवाज़, हर हार को निरस्त करके, मुश्किलों में मुस्कान लिए, तुम तो मेरे मीत प्रिये। इस जीवन के गीतों के स्वर नहीं आसान प्रिये, जहां मिले स्वर हमारा मधुर वही संगीत प्रिये। चलते रहे अगर साथ यूं ही, हर मुश्किल है आसान प्रिये, तुम तो मेरे मीत प्रिये, जीवन का संगीत प्रिये.
टिप्पणियाँ
समझ पा रही ,
रुख बदल कर
है हमें भटका रही ।
हां ज्योति जी हवा तो वैसे भी दीवानी ही होती है. उसके साथ बहेंगी तो पता नहीं क्या हो..
दिशा बदल रही है ,
उड़ा के धूल आँखों में
ले किधर जा रही है ,
ये दीवानी नही कुछ
समझ पा रही ,
अरे ज्योति जी बचना चाहिये ऎसी बावरी हवा से..
बहुत सुंदर कविता.
धन्यवाद
समझ पा रही ,
रुख बदल कर
है हमें भटका रही ।
कई तरह की हवा होती है ..........आज यह हवा कुछ दिवानी सी लग रही है ......जो थोडी बावरी सी है ........बहुत ही सुन्दर!
आज ये अपने
आप में नही
इन पंक्तियों में आपने सब कह दिया व्यक्त अव्यक्त सच।
सादर,
मुकेश कुमार तिवारी
समझ पा रही ,
रुख बदल कर
है हमें भटका रही । jyotiji bah jayegi hawa ke saath, lahron ke saath , apna hi anand hai.
hmko naa diga paayengi..
kar le chahe kitni hi koshish
hamara rukh naa mod paayengi..
:)
उस दिन बहार को मिरे घर का पता चला
वक़्त के दामन पर
छोटा सा पैगाम .
तुम्हारे गीत हवाओं के नाम.............
नीरज