संदेश

कुछ बाते

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इस दुनिया से ज्यादा कही खुद को समझना मुश्किल है , जिस दिन हम खुद को समझ गये राह समझ लो सब मुमकिन है । >>>>>>>>>>>>>>>>>>>>>> गुजरते वक़्त के साथ यहाँ कई बात बदल जाती है , मन तो बच्चा ही रहता है पर इच्छाये बड़ी हो जाती है । <<<<<<<<<<<<<<<<<<<<<<< आगे बढ़ने के लिए हमें बीती बातों से रिश्ता तोडना पड़ता है , जीवन को जीने के लिए कुछ बातों से समझौता करना पड़ता है। .

गरीबी

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इस  जहां में  गरीबी  इतनी  आसान  नहीं  यारो   एक  पेट  के लिए  आदमी कितना  भटकता  है यारो , कल  के सूरज  के लिए  यहाँ  कोई  नहीं  सोचता   आज  की  शाम  गुजर  जाये  यही  बहुत  है  यारो  , हर  वक़्त  वो  इसकी  फ़िक्र  में घुलता  रहता है   रात  से  भी  अधिक  गहरा  साया  इसका है  यारो  , जीने  के लिए  तमाम  कोशिशे  करता रहता है  वो  आदमी  जो  है ,हिम्मत  नहीं  छोड़ता  यारो  , हालत  इनकी  संभल  जाये  हमेशा  के लिए  ही   बस  यही  दुआ  मिलकर  अल्लाह  से करो  यारो  । 
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जरा  ठहर  कर  देखते  है   मंज़र  क्या  है  आगे  का  , बहुत  जरूरी  है  संभलना  पता  चलता  नहीं  इरादो  का। 

होकर भी साथ नहीं

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ख्वाब  वही   ख्वाहिश  वही  अल्फाज  वही   ज़ुबां  वही  , फिर  रास्ते  कैसे   जुदा  है  सफ़र  के  , कदम  साथ  अपने  दे  रहे  क्यों  नहीं  । कही  तो  कुछ   खलिश  है  मन में  जो  दिल  चाहकर  भी  मिल  रहा  नहीं  । 

मोहब्बत .........

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मोहब्बत   में  आदमी  जीता  कम  मरता  ज्यादा  है  , पाने  से  अधिक  खोने  के  लिए   डरता  ज्यादा  है  , यकीं  कम  ,उम्मीद  के  सहारे   चलता  ज्यादा  है  , तभी  संभल  नही  पाता  और  गिरता  ज्यादा  है  । 

हम अंत कभी नहीं चाहते .........

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एकता  और  प्रेम  की  मिसाल   हम  कायम  करना  चाहते  थे , अमन  और  इंसानियत  का  हथियार   हम इस्तेमाल  करना  चाहते  थे  , मगर  आक्रोश  और  जुनून  में   खौलते  हुए  चंद  विचार  , अस्त्र -शस्त्र  चलाने  पर   हमें  मजबूर  करते  रहे  , इतिहास  के  पन्ने  जो  पहले   वीर  गाथाओं  से  भरे  थे  , आज  काले  -काले  धब्बो  से  भरकर  भद्दे  होते  जा  रहे  , समय  को हम  चाहते  है  रोकना   इतिहास  को  हम चाहते है  बदलना   पर  दोनों  ही  हमारे  वश  में  नहीं  रहे  , हम  अंत  कभी  नहीं  चाहते  थे   पर   इसके  भागीदार  तो  बने  रहे  , ऐसा  लगता  है  मानो   ...

क्या .......?

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क्या  कहा  जाये  क्या  सुना  जाये  इस  क्या  से  आगे   यहाँ  कैसे  बढ़ा  जाये समझ  आता  नहीं  , क्योंकि  ये  दुनिया  अब   पहले  जैसे  सीधी  रही  नहीं  , तभी  आसान  बात  भी  मुश्किल  नज़र  आती  है  , किसी  से  कहे  कुछ  उसे  समझ  कुछ  और  आती  है  ।  शायद  इसलिए  ज़िन्दगी  अब , लम्हों  में  बिखर  जाती  है  ।